नन्हें हाथ को मिली नई जिंदगी, एसएन मेडिकल कॉलेज में जटिल सर्जरी से 6 वर्षीय बच्चे का हाथ बचाया गया

आगरा। चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के चिकित्सकों ने समय रहते त्वरित निर्णय, तकनीकी दक्षता और आपसी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए एक 6 वर्षीय बालक का हाथ कटने से बचा लिया। आगरा के धनोली गांव निवासी यह बालक खेलते समय ऊँचाई से गिर गया था, जिससे उसके दाहिने हाथ की हड्डी गंभीर रूप से टूट गई और असहनीय दर्द शुरू हो गया।

Dec 15, 2025 - 19:15
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नन्हें हाथ को मिली नई जिंदगी, एसएन मेडिकल कॉलेज में जटिल सर्जरी से 6 वर्षीय बच्चे का हाथ बचाया गया
ऑपरेशन के बाद बच्चे की देखभाल करती डाक्टरों की टीम ।

आगरा। चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के चिकित्सकों ने समय रहते त्वरित निर्णय, तकनीकी दक्षता और आपसी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए एक 6 वर्षीय बालक का हाथ कटने से बचा लिया। आगरा के धनोली गांव निवासी यह बालक खेलते समय ऊँचाई से गिर गया था, जिससे उसके दाहिने हाथ की हड्डी गंभीर रूप से टूट गई और असहनीय दर्द शुरू हो गया।

स्थानीय स्तर पर उपचार से कोई लाभ न मिलने पर परिजन बच्चे को एस.एन. मेडिकल कॉलेज की आपातकालीन सेवा में लेकर पहुँचे। यहां  की गई सीटी एंजियोग्राफी जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि सुप्राकॉन्डायलर फ्रैक्चर के कारण बच्चे की दाहिनी भुजा की मुख्य रक्त नली ब्रैकियल आर्टरी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी, जिससे हाथ में रक्त प्रवाह बंद हो गया था। चिकित्सकों के अनुसार यदि समय पर इलाज न मिलता तो हाथ में गैंग्रीन होने के साथ अम्प्यूटेशन जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसएनएमसी के ऑर्थोपेडिक्स एवं सीटीवीएस विभाग की टीमों ने आपसी समन्वय के साथ तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया। सबसे पहले ऑर्थोपेडिक्स विभाग के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अमृत गोयल के नेतृत्व में टूटी हुई हड्डी को सफलतापूर्वक फिक्स किया गया। इसके बाद सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. सुशील सिंघल एवं उनकी टीम ने अत्यंत जटिल वैस्कुलर सर्जरी करते हुए बच्चे की क्षतिग्रस्त ब्रैकियल आर्टरी को उसके ही पैर से निकाली गई स्वयं की नस (सैफेनस वेन) से जोड़कर नई रक्त नली बनाई। इस प्रक्रिया को ब्रैकियल आर्टरी रिकंस्ट्रक्शन विद इंटरपोज़िशन वेन ग्राफ्ट कहा जाता है।

दोनों सर्जरी पूरी तरह सफल रहीं। ऑपरेशन के तुरंत बाद बच्चे के हाथ में पुनः रक्त प्रवाह शुरू हो गया, दर्द से राहत मिली और सबसे अहम बात यह रही कि बच्चे का हाथ कटने से बच गया। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों में रक्त नलियों का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण इस तरह की बायपास सर्जरी तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन एसएनएमसी की ऑर्थोपेडिक्स और सीटीवीएस टीम ने इसे सफलतापूर्वक कर दिखाया।

वर्तमान में बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। यह सफलता न केवल चिकित्सकों की दक्षता को दर्शाती है, बल्कि आगरा को सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान भी दिलाती है। ऑपरेशन करने वाली टीम में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. अमृत गोयल, डॉ. मयूर एवं टीम, सीटीवीएस विभाग के 
डॉ. सुशील सिंघल, डॉ. अनुज गर्ग, एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रभा, डॉ. शाहिद, डॉ. अनुकृति शामिल थे। 

इस अवसर पर एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि अब इस प्रकार की जटिल और अत्याधुनिक सर्जरी आगरा में ही अनुभवी सुपर-स्पेशलिस्ट्स द्वारा सफलतापूर्वक की जा रही हैं। मरीजों को इलाज के लिए अब दिल्ली या जयपुर जाने की आवश्यकता नहीं है। यह उपलब्धि आगरा के सरकारी चिकित्सा संस्थान की बढ़ती क्षमताओं और समर्पित चिकित्सकों की मेहनत का जीवंत प्रमाण है।