संस्कृति की मशाल, गद्य की पहचान: बाबू गुलाब राय की 138वीं जयंती पर वृंदावन में साहित्य, विचार और चेतना का विराट संगम
वृंदावन। हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के सजग प्रहरी, विख्यात साहित्यकार बाबू गुलाब राय की 138वीं जयंती वृंदावन में गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में देश के विद्वान साहित्यकारों, संतों और शिक्षाविदों ने उनके साहित्य, व्यक्तित्व और सांस्कृतिक दृष्टि पर विस्तार से प्रकाश डाला और नई पीढ़ी को उनके समग्र कृतित्व के अध्ययन का आह्वान किया।
परमेश्वरी देवी धानुका सरस्वती विद्या मंदिर, गौशाला नगर, गोरे दाऊजी का मंदिर, वृंदावन में आयोजित समारोह की सभापति ब्रजभाषा की विदुषी संत आचार्य वत्स गोस्वामी रहीं। उन्होंने कहा कि बाबू गुलाब राय जैसे साहित्यकार और न्यायाधीश का होना दुर्लभ है। उनके ग्रंथों की सुगंध ऐसी है कि मात्र नामोच्चारण से ही मन अभिभूत हो उठता है। वे अज्ञान और अंधकार को मिटाकर भारतीय संस्कृति और साहित्य को पुष्पित-पल्लवित करने वाले मनीषी थे।
मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. अतुल प्रभाकर ने कहा कि बाबू गुलाब राय का व्यक्तित्व आकाश की भांति विशाल था। उनका गद्य, विशेषकर निबंध और समीक्षा हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। उनकी भाषा सरल, सरस और रोचक थी, जिससे पाठक सहज ही जुड़ जाता है। नई पीढ़ी को उनके समग्र साहित्य का गंभीर अध्ययन करना चाहिए।
अध्यक्षता करते हुए डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि बाबू गुलाब राय के साहित्य की सहजता और सरसता स्वयं पाठकों के हृदय में स्थान बना लेती है।
हिंदी साहित्य के मनीषी डॉ. प्रताप पाल शर्मा ने उन्हें आचार्य रामचंद्र शुक्ल की परंपरा का साहित्यकार बताते हुए कहा कि वे साहित्यकारों के पथप्रदर्शक रहे हैं।
बाबू गुलाब राय स्मृति संस्थान, आगरा की अध्यक्ष एवं विख्यात कवयित्री डॉ. शशि तिवारी ने सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया और संस्थान की वार्षिक गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य एवं साहित्यकार डॉ. सुषमा सिंह ने बाबू गुलाब राय को देश का अनुपम साहित्यकार बताते हुए उनके साहित्य के अनुसरण पर बल दिया।
वितरागी संत स्वामी महेश आनंद सरस्वती महाराज, वृंदावन के आराध्य राधा रमण लाल के सेवायत आचार्य पद्मनाभ गोस्वामी, डॉ. कृष्ण चंद्र गोस्वामी, डॉ. चंद्र प्रकाश, डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. मधुर बिहारी गोस्वामी, डॉ. अनिल गहलोत सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।
आगरा से आए शरद गुप्ता ने काव्य पाठ किया। समारोह में बाबू गुलाब राय के जीवन पर आधारित वृत्त चित्र का प्रदर्शन हुआ, जिसकी व्याख्या डॉ. सुबोध कुमार गुप्ता ने की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बृजभूषण चतुर्वेदी और गोपाल कृष्ण दुबे ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक डॉ. दीपशिखा इंजीनियर ने दिया। इस अवसर पर आगरा से आदर्श नंदन गुप्ता, राजेंद्र शर्मा, हेमंत कुमार द्विवेदी सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।