नाबार्ड और डीईआई की की ट्रेनिंग से बिचपुरी के किसानों को मिला मशरूम का हुनर, बदल गई खेती की तस्वीर

आगरा। भारत में मशरूम की खेती और खपत में तेज़ी से इज़ाफा हो रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण मशरूम के पोषण और औषधीय गुणों को लेकर लोगों में बढ़ती जागरूकता है। प्रोटीन, मिनरल और विटामिन से भरपूर मशरूम न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि डायबिटीज़, हृदय रोग, बीपी, हाइपरटेंशन, मोटापा और अन्य बीमारियों में भी लाभकारी माने जाते हैं। यही वजह है कि अब किसान परंपरागत खेती से आगे बढ़कर मशरूम उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं और अच्छी आमदनी कमा रहे हैं।

Feb 14, 2026 - 19:51
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नाबार्ड और डीईआई की की ट्रेनिंग से बिचपुरी के किसानों को मिला मशरूम का हुनर, बदल गई खेती की तस्वीर
नाबार्ड और डीईआई की ट्रेनिंग के बाद मशरूम पैदा करने वाले किसान।

देशभर में किसान बटन, ऑयस्टर, गैनोडर्मा, मिल्की, शिटाके, पैडी स्ट्रॉ और कॉर्डिसेप्स जैसे विभिन्न प्रकार के मशरूम उगाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। खासतौर पर ऑयस्टर मशरूम, जिसे कम लागत और आसान तकनीक से उगाया जा सकता है, छोटे किसानों और महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है।

नाबार्ड-डीईआई की पहल ने बदली तक़दीर

मशरूम की खेती में रुचि रखने वाले किसानों और युवाओं को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से नाबार्ड और दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीईआई) ने आगरा जिले के बिचपुरी ब्लॉक के किसानों के लिए एक महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया।

इस परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2024 से चार बैचों में 7-7 दिन की निःशुल्क ट्रेनिंग दी गई, जिसमें मशरूम की खेती, मार्केटिंग, क्वालिटी कंट्रोल और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के निर्माण की पूरी जानकारी दी गई। अब यह प्रोजेक्ट लगभग पूर्ण हो चुका है।

खेती के साथ मिला आर्थिक संबल

नाबार्ड के सहयोग से 16 किसानों को मशरूम की खेती के लिए झोपड़ियां (शेड) बनाने में आर्थिक मदद दी गई। प्रशिक्षण के बाद कई किसानों ने तकनीक को पूरी तरह अपनाया और अपनी झोपड़ियों में बटन और ऑयस्टर मशरूम का सफल उत्पादन किया। इससे उन्हें न केवल नियमित आमदनी मिली, बल्कि खेती के प्रति आत्मविश्वास भी बढ़ा।

महिलाओं और छोटे किसानों को मिला नया अवसर

इस कार्यक्रम ने खासतौर पर महिलाओं और छोटे किसानों को अपने घर के पीछे या सीमित जगह में मशरूम की खेती के लिए प्रेरित किया। ऑयस्टर मशरूम को सब्ज़ी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने के साथ-साथ अतिरिक्त आय का साधन बनाकर कई परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

SP_Singh AURGURU Editor