अंबेडकर विश्वविद्यालय में शुरू हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी, गांधी जी के मानवतावादी दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता पर हुआ मंथन
आगरा। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में शनिवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का विषय था — “गांधी जी का मानवतावादी दर्शन एवं वैश्विक प्रासंगिकता”। यह आयोजन गांधी अध्ययन केंद्र, समाज कार्य विभाग, समाज विज्ञान संस्थान और इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स , नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
गांधी अध्ययन केंद्र, समाज कार्य विभाग एवं इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन
आगरा। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में शनिवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का विषय था — “गांधी जी का मानवतावादी दर्शन एवं वैश्विक प्रासंगिकता”। यह आयोजन गांधी अध्ययन केंद्र, समाज कार्य विभाग, समाज विज्ञान संस्थान और इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स , नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रोफेसर आशु रानी, मुख्य अतिथि महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आज़मगढ़ के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार तथा मुख्य वक्ता गांधी अध्ययन केंद्र के पूर्व निदेशक प्रोफेसर एएन सिंह द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर संगोष्ठी सचिव डॉ. राजेश कुशवाहा, सह सचिव डॉ. राजीव वर्मा, संयोजक प्रो. रणवीर सिंह, और संरक्षक प्रो. मोहम्मद अरशद सहित अनेक विद्वान एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक — प्रो. संजीव कुमार
मुख्य अतिथि प्रोफेसर संजीव कुमार ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित किया, इसलिए वे हमारे राष्ट्रपिता कहलाए। गांधी जी ने न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में अपने विचारों से प्रभाव छोड़ा।
गांधी जी ने हमें स्वच्छता और साहस का पाठ पढ़ाया — कुलपति प्रो. आशु रानी
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि गांधी जी ने हमें स्वच्छता का महत्व समझाया और विषम परिस्थितियों में भी साहस एवं धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा दी। सत्य और अहिंसा के बल पर ही हम वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
शोधार्थियों ने साझा किए विचार, सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिखी उमंग
संगोष्ठी के पहले दिन विभिन्न विश्वविद्यालयों के सैकड़ों शोधार्थियों ने गांधी जी के मानवतावादी दर्शन और उनके वैश्विक प्रभाव पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में अन्य राज्यों से भी कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया, जिससे यह संगोष्ठी एक राष्ट्रीय विमर्श मंच बन गई। शाम को सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने गांधी जी के जीवन दर्शन पर आधारित प्रस्तुतियाँ दीं।