आलू बीज घोटाले में वे दो उप निदेशक भी सस्पेंड जिनके खिलाफ जांच रिपोर्ट में कोई संस्तुति नहीं थी
उत्तर प्रदेश शासन ने आगरा जिले में आलू बीज आवंटन में गड़बड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जब उद्यान विभाग के दो उप निदेशकों और एक जिला उद्यान अधिकारी सहित पांच कर्मचारियों को निलंबित किया तो आगरा से लखनऊ तक खलबली मच गई। उल्लेखनीय बात यह है कि लखनऊ के उप निदेशक पोटेटो कौशल कुमार और आगरा के उप निदेशक उद्यान डॉ. धर्मपाल सिंह के खिलाफ जांच समिति ने किसी कार्रवाई की संस्तुति नहीं की थी, फिर भी शासन ने इन दोनों बड़े अधिकारियों पर गाज गिराई तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये दोनों भी इसमें संलिप्त थे। इस अप्रत्याशित कार्रवाई से दोनों अधिकारी ही नहीं, पूरे विभाग के अधिकारी हतप्रभ हैं। बताया जाता है कि आलू बीज के ‘बंदरबांट का खेल’ लंबे समय से जारी था, जिसमें हर साल वही प्रभावशाली चेहरे बीज की खेप ले उड़ते थे, जिनमें कई राजनीतिक चेहरे भी शामिल रहे हैं।
आगरा से लखनऊ तक मची सनसनी
लखनऊ से लेकर आगरा तक उद्यान विभाग में सनसनी फैल गई जब शासन ने आलू बीज वितरण घोटाले में कड़ी कार्रवाई करते हुए उपनिदेशक पोटेटो लखनऊ कौशल कुमार, उपनिदेशक उद्यान आगरा डॉ. धर्मपाल सिंह, जिला उद्यान अधिकारी बैजनाथ सिंह, सहायक निरीक्षक संजीव यादव और लिपिक सुनील वर्मा को निलंबित कर दिया। संजीव यादव और सुनील वर्मा को पहले ही 6 नवंबर को निलंबित किया जा चुका था।
आगरा में किसानों के हंगामे से खुला था खेल
आगरा में कुछ सप्ताह पूर्व आलू उत्पादक किसानों ने बीज वितरण में गड़बड़ी को लेकर हाथरस रोड पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया था। मामला तूल पकड़ने पर शासन ने आईएएस देवेंद्र कुमार सिंह कुशवाहा की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की। इस समिति में डॉ. सर्वेश कुमार और डॉ. राजीव वर्मा को सदस्य बनाया गया था। किसान नेता श्याम सिंह चाहर, लक्ष्मीनारायण बघेल, लाखन सिंह त्यागी आदि ने समिति के समक्ष लिखित शिकायतें दर्ज कराईं। जांच रिपोर्ट में तीन अधिकारियों को दोषी बताया गया। ये हैं- डीएचओ बैजनाथ सिंह, निरीक्षक संजीव कुमार और लिपिक सुनील वर्मा।
जांच रिपोर्ट में नहीं था दोनों उपनिदेशकों का उल्लेख
जांच समिति की रिपोर्ट में दोनों उपनिदेशक कौशल कुमार और डॉ. धर्मपाल सिंह के खिलाफ किसी कार्रवाई की संस्तुति नहीं की गई थी। इसके बावजूद अपर मुख्य सचिव उद्यान बाबूलाल मीणा पर रिपोर्ट पहुंची तो उन्होंने दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई ने पूरे विभाग में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। विभागीय अधिकारी इसे अप्रत्याशित प्रशासनिक झटका बता रहे हैं।
आलू बीज वितरण में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि आलू बीज वितरण में “मनमानी, अपारदर्शिता और नियमविरुद्ध प्रक्रिया” अपनाई गई। किसानों को बिना रसीद बीज उपलब्ध कराए गए, आवेदन पंजिका अधूरी भरी गई, और सरकारी शीतगृहों से रवाना ट्रकों को बीच रास्ते में ही रोककर वितरण किया गया। यह भी सामने आया कि प्रथम आवक-प्रथम पावक के नियम को तोड़कर पर्चियों के माध्यम से बीज बांटा गया। किसानों में वर्षों से यह रोष था कि बीज उन्हीं प्रभावशाली लोगों को दिया जाता है जो ‘राजनीतिक संरक्षण’ में हैं।
कौशल कुमार ने कहा- हमें नहीं मिला लिखित आदेश
निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए उपनिदेशक पोटेटो लखनऊ कौशल कुमार ने कहा कि उन्हें अब तक कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि हमने तो जिलों से प्राप्त मांग के अनुरूप मेरठ और लखनऊ से बीज आवंटित किया था। रास्ते में कोई ब्लैक करे तो हम जिम्मेदार कैसे ठहराए जा सकते हैं? वहीं, डॉ. धर्मपाल सिंह लखनऊ गये हुए हैं।
सींगना फार्म और राजनीतिक संरक्षण का संदिग्ध गठजोड़
किसान नेता श्याम सिंह चाहर के अनुसार, सींगना फार्म में आलू बीज की खुदाई और वितरण में वर्षों से धांधली चल रही थी। हर बार वही प्रभावशाली और रसूखदार चेहरे बीज ले जाते थे, जबकि असली किसान वंचित रह जाते थे। चाहर ने कहा कि हमने बार-बार शासन को इस खेल से अवगत कराया, आखिरकार कार्रवाई हुई। उन्होंने यह भी बताया कि उनके खिलाफ झूठी खबर फैलाई गई थी कि उन्होंने 60 क्विंटल बीज लिया, जो कभी सिद्ध नहीं हुआ।