‘ढाई आखर प्रेम का’: कबीर की वाणी और प्रेम-संदेश से सराबोर हुई क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी
भाईचारा, प्रेम और मानवीय एकता की भावना को समर्पित ‘ढाई आखर प्रेम का’ कार्यक्रम ने रविवार की शाम क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी को संत कबीर दास के दोहों, सबदों और रमैनियों की अमर गूंज से सराबोर कर दिया। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ग़ज़ल गायक सुधीर नारायन ने जब ‘भला हुआ मेरी मटकी फूटी’, ‘हमन है इश्क मस्ताना’ और ‘मोको कहा ढूंढे रे बन्दे’ जैसी रचनाएं सस्वर प्रस्तुत कीं, तो सभागार में उपस्थित श्रोता कबीर की चेतना और संगीत के समरस संगम में डूब गए।
आगरा। क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी में आयोजित ‘ढाई आखर प्रेम का’ कार्यक्रम आगरा की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत का जीवंत उत्सव साबित हुआ। प्रेम, सहिष्णुता और सामाजिक समरसता की भावना को स्वर देने वाले इस आयोजन में प्रख्यात ग़ज़ल गायक सुधीर नारायन ने कबीर दास की रचनाओं को संगीत के सुरों में पिरोकर अद्भुत वातावरण बना दिया।
उन्होंने कहा कि अंधविश्वास, व्यक्ति पूजा और पाखंड के खिलाफ कबीर दास जितने 15वीं सदी में प्रासंगिक थे, उससे अधिक आज ज़रूरी हैं। हाल में अमेरिका और अन्य देशों के दौरे से लौटे श्री नारायन ने बताया कि अब विदेशों में भी कबीर दास के विचारों की गूंज सुनाई दे रही है। लोग अब केवल जानते नहीं, बल्कि समझते भी हैं कि कबीर का दर्शन आज की अशांति में शांति का मार्ग है।
कार्यक्रम के दौरान सुधीर नारायन ने कबीर के अनेक प्रसिद्ध सबद और दोहे सस्वर प्रस्तुत किए-
-भला हुआ मेरी मटकी फूटी, मैं तो पनिया भरन से छूटी।
-हमन है इश्क मस्ताना।
-जरा धीरे-धीरे गाड़ी हांको मेरे राम गाड़ी वाले।
-मोको कहा ढूंढे रे बन्दे मैं तो तेरे पास में।
-चदरिया झीनी रे झीनी, मोरी चुनरी में पर गयो दाग पिया, बीत गए दिन भजन बिना रे, मन लाग्यो मेरो यार फकीरी में आदि।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट के माध्यम से कबीर दास जी का दर्शन अब विश्व के हर कोने में पहुंच चुका है।
कबीर दास जी की अभिव्यक्ति निडर- पुलिस आयुक्त
मुख्य अतिथि आयुक्त पुलिस दीपक कुमार ने कहा कि कबीर दास जी की निडर अभिव्यक्ति ‘न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर’ उन्हें सदियों से विशिष्ट बनाती आई है। उन्होंने कहा कि वे यूपी के अनेक शहरों में नियुक्त रहे हैं, लेकिन आगरा में कार्य दायित्व के दौरान उनके लिए यहां की साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियां विशिष्ट हैं।
अपर जिलाधिकारी नगर यमुनाधर चौहान ने भी कबीर की रचनाओं की सामाजिक प्रेरणा को रेखांकित किया।
साहित्यिक वक्तव्य और अतिथियों के संबोधन
साहित्यकार डॉ. कुसुम चतुर्वेदी ने कबीर के रहस्यवाद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी वाणी आत्मा की स्वतंत्रता का प्रतीक है।
अरुण डंग ने कहा, कबीर की चेतना आज के समाज में भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी तब थी।
डेवलपमेंट काउंसिल फॉर फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्री के चेयरमैन पूरन डावर ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में साहित्य और आध्यात्मिकता के संतुलन को बनाए रखते हैं।
संस्था के सचिव अनिल शर्मा ने कहा कि आगरा की साहित्यिक परंपरा नज़ीर अकबराबादी से लेकर आज तक जीवित है, और संस्था इसे बनाए रखने के लिए निरंतर कार्यरत है। उन्होंने डॉ. पंकज महेंद्रू और बृजेश तिवारी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी को फिर से साहित्यिक केंद्र के रूप में जीवित किया है।
इन संस्थाओं और सहयोगियों की रही भागीदारी
इस आयोजन में अमृता विद्या - एजुकेशन फॉर इम्मॉर्टैलिटी, पंकज स्कैनिंग एंड पैथोलॉजी तथा कुंदन सोप का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में श्री नारायन के साथ ख़ुशी सोनी, देश दीपक शर्मा, गति सिंह, राधा तोमर, अमन शर्मा, अक्षय प्रताप, सुरेश, राज मैसी, राजू पाण्डेय, दिनेश श्रीवास्तव आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम संचालन श्रीमती श्रुति सिन्हा ने किया। उद्यमी एवं वाइल्डलाइफ राइटर हरविजय सिंह बाहिया और पूरन डावर ने हार्मनी ग्रुप के सभी सदस्यों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना ने अंत में सभी आगंतुकों का आभार जताया।
क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी का गौरवशाली इतिहास
सदर बाजार स्थित इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी की स्थापना शहजादी मंडी रोड चौराहे पर जोन्स मिल संचालकों के परिवार द्वारा किंग जॉर्ज पंचम के वायसराय काल की स्मृति में की गई थी।
1905 में महारानी विक्टोरिया की पुत्रवधू क्वीन मैरी ने अपनी पहली आगरा यात्रा की थी और 1911 में महारानी के रूप में पुनः आगरा आईं। वे पुस्तकों की शौकीन थीं और कहा जाता है कि उन्होंने अपने निजी संग्रह से अनेक पुस्तकें इस लाइब्रेरी को भेंट की थीं।
कार्यक्रम में रेणुका डंग, आनंद शर्मा, असलम सलीमी, डॉ. मधु भारद्वाज, डॉ. महेश शर्मा, विशाल सिंह, सय्यद शाहीन हाश्मी, ग्रुप कैप्टन जयपाल सिंह चौहान, डॉ. मुकुल पंड्या, डॉ. सांची महेंद्रू आदि उपस्थित रहे।