दो मिनट का ठहराव और एक ज़िंदगी का जोखिम: रेल फूड डिलीवरी सिस्टम पर बड़ा सवाल

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर रेलवे स्टेशन पर सामने आया एक वीडियो देश की तेज़ होती सुविधाओं के पीछे छुपे खतरनाक सच को उजागर कर रहा है। प्रशांति एक्सप्रेस में खाना पहुंचाने के दौरान एक स्विगी डिलीवरी पार्टनर ट्रेन से गिर गया, क्योंकि ट्रेन का ठहराव महज़ 2 मिनट का था। यह हादसा सिर्फ़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि रेलवे और निजी फूड डिलीवरी कंपनियों की साझा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है कि क्या सुविधा की दौड़ में इंसानी जान सबसे सस्ती हो गई है?

Jan 12, 2026 - 11:47
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दो मिनट का ठहराव और एक ज़िंदगी का जोखिम: रेल फूड डिलीवरी सिस्टम पर बड़ा सवाल
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में खाना पहुंचाने के बाद ट्रेन से उतरते समय प्लेटफॊर्म पर गिरा डिलीवरी ब्वॊय।

दो मिनट का ठहराव: अव्यावहारिक और जानलेवा

अनंतपुर जैसे मध्यम श्रेणी के स्टेशनों पर कई ट्रेनों का ठहराव केवल 2 मिनट का होता है। इतने कम समय में प्लेटफॉर्म तक पहुंचना, सही कोच और बर्थ की पहचान, यात्री को खाना सौंपना और सुरक्षित उतरना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है। इस जल्दबाज़ी में डिलीवरी पार्टनर को दौड़ती ट्रेन, फिसलते प्लेटफॉर्म और भीड़ के बीच जान जोखिम में डालनी पड़ती है।

सुविधा बनाम सुरक्षा का टकराव

रेल फूड डिलीवरी को स्विगी और जोमेटो जैसी कंपनियां आधुनिक सुविधा और डिजिटल प्रगति के तौर पर पेश कर रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या समय पर डिलीवरी, कर्मचारियों की सुरक्षा से ऊपर है? क्या ग्राहक की थाली गर्म रखने के लिए डिलीवरी पार्टनर की जान दांव पर लगाई जा सकती है? अनंतपुर की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा व्यवस्था में मानव सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जा रही।

रेलवे की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी

इंडियन रेलवे जैसी विशाल और सार्वजनिक संस्था की यह जिम्मेदारी बनती है कि 2–3 मिनट ठहराव वाले स्टेशनों पर रेल फूड डिलीवरी की अनुमति न दी जाए। केवल कम से कम 5 मिनट या उससे अधिक ठहराव वाले स्टेशनों पर ही यह सेवा लागू हो। ट्रेन स्टाफ और डिलीवरी पार्टनर के बीच स्पष्ट समन्वय व्यवस्था बने। न्यूनतम 5 मिनट ठहराव के बिना रेल फूड डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। डिलीवरी पार्टनर्स के लिए स्पष्ट सुरक्षा हो। हादसे की स्थिति में फूड कंपनी की कानूनी जवाबदेही तय हो। रेलवे और फूड डिलीवरी कंपनियों के बीच स्पष्ट दिशानिर्देश और अनुबंध होने चाहिए।

विकास वही जो जीवन की रक्षा करे

देश का विकास केवल सुविधाओं और ऐप्स से नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और सुरक्षा से मापा जाना चाहिए। एक डिलीवरी पार्टनर की जान जाना महज़ दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता है। खाना फिर मंगाया जा सकता है, लेकिन एक इंसान की जान नहीं। अब वक्त है कि सुविधा से पहले सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, ताकि भारत का विकास तेज़ होने के साथ-साथ सुरक्षित भी हो।

SP_Singh AURGURU Editor