बरेली में वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ की ठगे के मामले में दो और मिर्जापुर से गिरफ्तार
बरेली। साइबर अपराध नियंत्रण के तहत गठित टीम ने वैज्ञानिक से 1.29 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह के दो और सक्रिय सदस्यों को मिर्जापुर से गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पहले ही चार अभियुक्तों को 5 जुलाई को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने बताया कि यह गिरोह देशभर में फैले नेटवर्क के माध्यम से लोगों को फर्जी सीबीआई या पुलिस अधिकारी बनकर डराने-धमकाने और डिजिटल अरेस्ट के ज़रिए ठगी करता था। यह गिरोह दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों में सक्रिय है।
ठगी का शिकार हुए व्यक्ति भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक शुकदेव नंदी हैं। उन्हें 17 से 20 जून 2025 के बीच व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के माध्यम से फर्जी अधिकारी बनकर धमकाया गया कि उनके नाम से ह्यूमन ट्रैफिकिंग व जॉब फ्रॉड हुआ है और गिरफ्तारी से बचने के लिए 1.29 करोड़ रुपये तीन अलग-अलग खातों में आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कराए गए।
गिरोह ने ठगी की रकम को 125 अलग-अलग खातों में बांटकर क्रिप्टो करेंसी में बदल दिया और अपने गिरोह के वॉलेट्स में भेज दिया।
गुरुवार को मिर्जापुर से गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दीपू पांडेय (21 वर्ष) बीए पास करने के बाद एमए की तैयारी कर रहा है। दूसरा आरोपी शुभम यादव (22 वर्ष) आठवीं पास है और वाराणसी में जम्बो बैग कंपनी में कम करता है।
इनके पास से एक आईफोन, एक एंड्रॉयड फोन और तीन एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। एसएसपी ने प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार शर्मा और उनकी टीम की कार्यशैली की सराहना की और उन्हें शाबाशी दी।