आगरा में यूजीसी बिल पर उबाल, शिक्षा और संविधान बचाने सड़कों पर उतरे लोग
आगरा में UGC की नई नीतियों और बिल के खिलाफ सर्वण समाज द्वारा कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक समानता को खतरे में बताया गया। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने इसे “बाँटो और राज करो” की नीति बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया और बिल वापस न लेने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।
यूजीसी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरा समाज, कैंडल मार्च से उठा विरोध का तूफान, राजीव गांधी बार एसोसिएशन ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
आगरा। आगरा में यूजीसी की नई नीतियों और प्रस्तावित बिल के खिलाफ विरोध अब तेज होता जा रहा है। समाज को बाँटने वाली और देश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाली नीतियों के विरोध में सर्वण समाज, आगरा के तत्वावधान में 28 जनवरी 2026 को एक शांतिपूर्ण लेकिन सशक्त कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। अधिवक्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया।
यह कैंडल मार्च सायं 5 बजे शहीद स्मारक, संजय पैलेस से प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में जागरूक नागरिकों, शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। हाथों में मोमबत्तियां और आंखों में आक्रोश लिए लोगों ने साफ संदेश दिया कि शिक्षा व्यवस्था के साथ किसी भी तरह का भेदभाव, अन्याय और मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।
आयोजकों ने कहा कि यूजीसी द्वारा लागू किए जा रहे नए कानून शिक्षा के मूल सिद्धांतों, समानता के अधिकार और भारतीय संविधान की भावना के विरुद्ध हैं। इन नीतियों से समाज में विभाजन बढ़ेगा और इसका सीधा नकारात्मक असर छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारों पर पड़ेगा। कैंडल मार्च के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि समूचे समाज के भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए है।
इस कैंडल मार्च में प्रमुख रूप से कपिल बाजपेई, डॉ. मदन मोहन शर्मा, दिलीप बंसल, डॉ. मुनेश्वर गुप्ता, नितिन जौहरी, नकुल सारस्वत, विधायक शर्मा, दीपक सारस्वत, विजय यादव, अनिल शर्मा, गोपाल शर्मा, संतोष पांडेय, एडवोकेट अश्वनी शर्मा, विशाल शर्मा, योगेश कुलश्रेष्ठ, मनीष गौतम, राकेश शर्मा, आलोक दीक्षित, त्रिभुवन भारद्वाज, बिट्टू पंडित, रवि गोयल, सागर बंसल, मंजू बाजपेई, तनिष्का बाजपेई, अपेक्षा गोयल, गोरी गोयल, आस्था बंसल, जूली बंसल, शाहरुख, अभिषेक शर्मा, विमल गुप्ता, आशीष पचौरी, कौशलेंद्र शर्मा, सैम यादव, ललित बंसल, गौरव शर्मा एवं हरिओम तिवारी उपस्थित रहे।
राजीव गांधी बार एसोसिएशन का तीखा हमला
वहीं दूसरी ओर राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमाशंकर शर्मा ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए UGC बिल का तीव्र विरोध किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार देश में जाति विभाजन और जातीय संघर्ष को बढ़ावा दे रही है। वोटों की राजनीति के लिए सवर्ण, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों के बीच खाई खोदी जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि “जो काम अंग्रेजों ने किया था, वही काम आज मोदी सरकार कर रही है—बाँटो और राज करो। यह देश की जनता के साथ बहुत बड़ी साज़िश है।” शर्मा ने कहा कि इस बिल के माध्यम से बच्चों के मन में जातियों का जहर घोला जा रहा है, जबकि बच्चे साथ पढ़ते, खेलते और खाते हैं। यह न सिर्फ निंदनीय बल्कि आने वाले समय में बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने दशकों में असमानता की खाई को पाटने का काम किया, लेकिन भाजपा सरकार इस बिल के जरिए फिर से समाज को बाँटने पर आमादा है। श्री शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि यह बिल वापस नहीं लिया गया तो 31 जनवरी के बाद राजीव गांधी बार एसोसिएशन बड़ा आंदोलन करेगी।
साधु-संतों के अपमान पर भी विरोध
रमाशंकर शर्मा ने प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और अन्य संतों के कथित अपमान की भी तीखी निंदा की। उन्होंने कहा कि जो सरकार सनातन धर्म और हिंदू एकता की बात करती है, वही हिंदुत्व के नाम पर साधु-संतों और सनातन परंपराओं का अपमान कर रही है, जिसे देश की जनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने आगरा के सभी सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और भाजपा पदाधिकारियों से आह्वान किया कि यदि उनमें जरा सी भी नैतिकता बची है, तो इन मुद्दों पर भाजपा से इस्तीफा दें, क्योंकि जनता के हर वर्ग ने उन्हें समर्थन देकर सत्ता तक पहुँचाया है।