अनियंत्रित डायबिटीज से बढ़ता डिमेंशिया, एल्जायमर और वृद्धावस्था की जटिल बीमारियां, 38वीं जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की वार्षिक कार्यशाला में विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी

वृद्धावस्था में तेजी से बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियां आने वाले समय में समाज और स्वास्थ्य तंत्र के लिए गंभीर चुनौती बनने जा रही हैं। डायबिटीज, थॉयरायड, हृदय रोग और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का सीधा असर बुजुर्गों की याद्दाश्त, गतिशीलता और आत्मनिर्भरता पर पड़ रहा है। इन्हीं मुद्दों पर गहन मंथन के लिए आगरा में आयोजित जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की 38वीं वार्षिक कार्यशाला में देश-विदेश से आए 500 से अधिक विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध साझा किए।

Dec 14, 2025 - 18:34
Dec 14, 2025 - 18:36
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अनियंत्रित डायबिटीज से बढ़ता डिमेंशिया, एल्जायमर और वृद्धावस्था की जटिल बीमारियां,  38वीं जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की वार्षिक कार्यशाला में विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी

डायबिटीज में तीन गुना बढ़ जाता है डिमेंशिया का खतरा

आगरा। डायबिटीज के रोगियों में लगभग 15 से 20 वर्ष बाद डिमेंशिया या एल्जायमर (कमजोर याद्दाश्त) का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में तीन गुना तक बढ़ जाता है, विशेषकर उन मरीजों में जो अपने शुगर स्तर को नियंत्रित रखने में लापरवाही करते हैं।
यह जानकारी जीरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की 38वीं वार्षिक कार्यशाला में आयोजन समिति के अध्यक्ष और आगरा के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुनील बंसल ने दी।

डॉ. बंसल ने बताया कि दिमाग तक पर्याप्त इंसुलिन न पहुंच पाने के कारण सूचनाओं को संग्रहित करने और उन्हें संप्रेषित करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। जहां सामान्य लोगों में डिमेंशिया की संभावना लगभग 15 प्रतिशत होती है, वहीं डायबिटीज रोगियों में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। रोग बढ़ने पर व्यक्ति छोटी-छोटी बातें भूलने लगता है, यहां तक कि शर्ट के बटन लगाना या अपने घर का रास्ता पहचानना भी कठिन हो जाता है।

उन्होंने बताया कि जो लोग 35–40 वर्ष की आयु में डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं और यदि वे इसे नियंत्रित नहीं रखते, तो 60 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उनमें एल्जायमर का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। बीपी, कोलेस्ट्रोल, मोटापा और अकेले रहना इस समस्या को और गंभीर बना देते हैं। इसलिए शुरू से ही वजन, शुगर, कोलेस्ट्रोल और बीपी को नियंत्रण में रखना जरूरी है।

डॊ. बंसल ने सलाह दी कि 60 वर्ष के बाद नई-नई चीजें सीखें, परिवार और मित्रों के साथ समय बिताएं, मानसिक योग करें तथा भोजन में एंटीऑक्सीडेंट युक्त चीजें जैसे रंगीन फल-सब्जियां, गाजर, टमाटर, बादाम और अखरोट शामिल करें, जो क्षतिग्रस्त मस्तिष्क कोशिकाओं की सफाई में सहायक होते हैं। डॉ. बंसल ने यह भी बताया कि प्रदूषण भी एल्जायमर का एक बड़ा कारण है और भविष्य में बुजुर्गों में यह बीमारी एक गंभीर समस्या बनने वाली है।

60 के बाद घबराहट और तेज धड़कन हो तो थॉयरायड जांच जरूरी

आगरा। आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ए.के. गुप्ता ने अपने व्याख्यान में बताया कि सामान्य उम्र में हाइपर थॉयरायड के लक्षण हाथों में कंपन, आंखों का बाहर निकलना और दस्त होते हैं, लेकिन 60 वर्ष के बाद यही बीमारी अलग रूप में सामने आती है।
इस आयु वर्ग में घबराहट, हृदयगति का तेज हो जाना, कब्ज, वजन कम होना जैसे लक्षण उभरते हैं। वृद्धावस्था में यह एक सामान्य समस्या है, जो थॉयरायड हार्मोन के अधिक स्राव के कारण होती है।

अनियंत्रित डायबिटीज से न्यूरोपैथी, किडनी और आंखों की बीमारियां

आगरा। फिरोजाबाद के डॉ. प्रवीन गुप्ता ने बताया कि वृद्धावस्था में अनियंत्रित डायबिटीज के कारण लगभग 50 प्रतिशत लोगों में पैरीफेरल न्यूरोपैथी, 42–45 प्रतिशत में किडनी संबंधी समस्या और 25–30 प्रतिशत में रेटिनोपैथी की शिकायत पाई जाती है।

उन्होंने बताया कि ब्लड शुगर शरीर की रक्त नलिकाओं को उसी तरह क्षतिग्रस्त करता है, जैसे खारा पानी पाइपलाइन को खराब कर देता है। इसके साथ ही 30–70 प्रतिशत बुजुर्गों में त्वचा संबंधी समस्याएं भी देखी जा रही हैं। कई मामलों में लोगों को डायबिटीज होने का पता त्वचा रोग सामने आने पर ही चलता है। इसमें अल्सर, जननांगों के पास खुजली, फंगल संक्रमण और घाव जैसी समस्याएं शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन लक्षणों को हल्के में न लें और समय रहते इलाज कराएं।

बुजुर्गों के बाथरूम में हैंडिल और स्टूल जरूरी

आगरा। फिरोजाबाद के डॉ. एस.पी.एस. चौहान ने बताया कि वृद्धावस्था में चलते-चलते गिरना लगभग 80 प्रतिशत बुजुर्गों की आम समस्या है। इससे बचाव के लिए मस्क्यूलर ट्रेनिंग के साथ-साथ घर में सुरक्षित वातावरण जरूरी है।
उन्होंने सुझाव दिया कि बुजुर्गों के बाथरूम में बैठने और खड़े होने के लिए हैंडिल अवश्य लगवाएं, कपड़े पहनते समय संतुलन बनाए रखने के लिए एक स्टूल रखें और फिसलन वाली टाइल्स का उपयोग न करें। कई मामलों में गिरने से सिर में गंभीर चोट लग जाती है, जो जानलेवा भी हो सकती है।

SP_Singh AURGURU Editor