किरावली थाने में बर्बरता के मामले में यूपी मानवाधिकार आयोग ने पुलिस कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी
आगरा जनपद के थाना किरावली में निर्दोष राजू शर्मा के साथ पुलिसिया बर्बरता के मामले को मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मामला मानते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने इसका संज्ञान ले लिया है। इसी क्रम में आयोग ने आगरा के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर 18 फरवरी तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 19 फरवरी को मामले में कार्यवाही की जाएगी।
बता दें कि यह मामला थाना किरावली क्षेत्र का है, जहां क्षेत्र के निवासी राजू शर्मा को पुलिस द्वारा जबरन उठाकर थाने ले जाया गया। आरोप है कि थानाध्यक्ष नीरज कुमार के निर्देश पर राजू शर्मा को थाने में अमानवीय तरीके से थर्ड डिग्री यातनाएं दी गईं।
पीड़ित को उल्टा लटकाकर लगातार डंडों से पीटा गया। इस दौरान पुलिस ने उस पर पांच डंडे तोड़ दिए। जब तक राजू शर्मा बेहोश नहीं हो गया, तब तक मारपीट जारी रही। इस बर्बरता का परिणाम उसकी दोनों टांगों का टूटने और शरीर पर गंभीर चोटों के रूप में सामने आया। पुलिस बर्बरता का मामला सामने आने पर पुलिस आयुक्त ने उसी समय थानाध्यक्ष और अन्य दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन पीड़ित पक्ष दोषियों के खिलाफ मुकदमे की मांग कर रहा था, जो अब तक पूरी नहीं हुई है।

सामाजिक कार्यकर्ता नरेस पारस, जो राजू शर्मा के मामले को यूपी मानवाधिकार आयोग तक ले गये हैं।
इस मामले में मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नरेश पारस द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग को भेजी गई थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने 13 जनवरी को पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर पूरे प्रकरण पर रिपोर्ट मांगी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। जांच अधिकारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। न तो उन्हें पीड़ित की टूटी टांगें दिखाई दे रही हैं और न ही उसका असहनीय दर्द। यह भी चर्चा में है कि रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़े जांच अधिकारी सच्चाई को नजरअंदाज कर रहे हैं।
अब यह मामला केवल एक युवक की पिटाई का नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र की जवाबदेही और मानवाधिकारों की रक्षा का सवाल बन गया है। मानवाधिकार आयोग की आगामी कार्यवाही पर सभी की निगाहें टिकी हैं।