यूपी के मंत्री धर्मपाल सिंह बोले- गोकशी के ‘आकाओं’ के दबाव में भ्रम फैलाना चाहते हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, योगी सरकार में गोवंश का अपमान बर्दाश्त नहीं
-आरके सिंह- बरेली। उत्तर प्रदेश के पशुधन विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे गोकशी को लेकर सफेद झूठ फैला रहे हैं और कथित गोकशी के ‘आकाओं’ के दबाव में प्रदेश में भ्रम और अराजकता फैलाना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की कोशिशों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शनिवार को सर्किट हाउस, बरेली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि हम स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं मानते। शंकराचार्य कोई सरकारी नियुक्ति या संवैधानिक पद नहीं, बल्कि मठों और परंपराओं से जुड़ा विषय है। सरकार किसी ऐसे व्यक्ति को मान्यता नहीं देगी जो धार्मिक पद की आड़ में जनता को भ्रमित करे। प्रशासन का दायित्व केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, किसी विवादित दावे पर मुहर लगाना नहीं।
उन्होंने साफ किया कि उत्तर प्रदेश में गोमांस और गौ-हत्या पूरी तरह प्रतिबंधित है। प्रदेश से नियमों के तहत केवल सूअर, भैंस और बकरे का मांस ही निर्यात किया जाता है। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति धार्मिक मर्यादा भूलकर कानून तोड़ेगा, उसे कोई रियायत नहीं मिलेगी। योगी सरकार में आस्था से खिलवाड़ और गोवंश के अपमान के लिए कोई जगह नहीं है।
धर्मपाल सिंह ने बताया कि 2017 में सत्ता संभालते ही योगी सरकार का पहला बड़ा फैसला अवैध बूचड़खानों को बंद करना था। आज प्रदेश में हजारों अवैध स्लॉटर हाउस बंद हैं और पशु तस्करों के खिलाफ एनएसए (NSA) के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। गोकशी करने वाले अपराधी जेलों में हैं। सरकार की नीति ‘विवाद से दूरी और व्यवस्था पर फोकस’ की है, जिसमें गोवंश संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने न केवल पर्याप्त बजट आवंटन किया है, बल्कि गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नेचुरल फार्मिंग और बायोगैस मॉडल पर भी काम शुरू किया है। शनिवार को उन्होंने जिले के फरीदपुर स्थित पचौमी में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय वृहद पशु आरोग्य मेले में भाग लिया।
मंत्री ने भारतीय संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत पर्वों, कृषि और ऋषि परंपरा का देश है। कृषि हमें अन्न देती है और ऋषि जीवन जीने की सही शैली सिखाते हैं। आज सबको दूध, दही और घी चाहिए, लेकिन पशुपालन से लोग कतराते हैं। यदि पशुपालन नहीं होगा तो ये आवश्यक वस्तुएं कैसे मिलेंगी? उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता में गोशाला, पाठशाला, व्यायामशाला और यज्ञशाला का विशेष महत्व रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि दूध देना बंद होते ही गायों को छोड़ दिया जाता है। भाजपा सरकार इस गंभीर समस्या पर ठोस कार्य कर रही है—मोदी जी और योगी जी हैं तो मुमकिन है।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि आय बढ़ाने के लिए गाय पालन को अपनाएं। आंवला में दुग्ध डेयरी की स्थापना की गई है, जो दूध खरीदने के बाद प्रत्येक सप्ताह भुगतान करेगी। साथ ही आंवला में 10 करोड़ रुपये की लागत से पशु पॉलीक्लीनिक का निर्माण किया जा रहा है।
मेले के दौरान ग्राम प्रधानों और कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। मंत्री ने दोहराया कि सरकार गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नेचुरल फार्मिंग और बायोगैस जैसे स्थायी मॉडलों पर तेजी से आगे बढ़ रही है।
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