अमेरिका-ईरान में टकराव और बढ़ा, मिसाइली हमलों से दहला मिडिल ईस्ट, तेल सप्लाई पर मंडराया संकट
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया है। होर्मुज स्ट्रेट पर संकट गहराने से वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर असर पड़ सकता है। भारत ने सुरक्षा कारणों से भारतीय नाविकों की तैनाती रोक दी है, जबकि ईरान और अमेरिका दोनों ओर से कड़ी चेतावनियां जारी की जा रही हैं।
खाड़ी देशों में हाई अलर्ट, तेल सप्लाई और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ा तनाव, भारत ने भी उठाया बड़ा कदम
वाशिंगटन। मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है। गुरुवार तड़के अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट, रक्षा प्रतिष्ठानों और सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित 388वीं ब्रिगेड की बैरकों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। इसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं। बहरीन और कुवैत में मिसाइल हमलों की चेतावनी जारी की गई, जबकि जॉर्डन ने दावा किया कि उसने अपनी सीमा की ओर बढ़ रही आठ ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया है।
ईरान की दो टूक चेतावनी
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि यदि वॉशिंगटन अपने सैन्य अभियान को नहीं रोकता, तो ईरान बड़े सैन्य टकराव के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं, ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोल्फाघरी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक ढांचे और बुनियादी ढांचे पर हमला किया, तो ईरानी सेना पूरे मध्य-पूर्व के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकती है। रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने भी संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर मिडिल-ईस्ट से तेल और गैस की सप्लाई को बाधित किया जा सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा संकट, शिपिंग कंपनियां सतर्क
ईरानी हमलों और युद्ध के खतरे के बीच दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ गया है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अब इस रास्ते से गुजरने के लिए अमेरिकी सुरक्षा सहायता लेने से भी बच रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही प्रभावित होती है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए भारत सरकार का बड़ा फैसला
फारस की खाड़ी में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने आदेश जारी कर फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती रोक दी है। सरकार ने शिपिंग कंपनियों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और क्रू भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया है कि हालात सामान्य होने तक भारतीय नाविकों को इस संवेदनशील क्षेत्र में न भेजा जाए।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब हालिया हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है। ओमान के तट के पास कारोबारी जहाज GFS गैलेक्सी पर 12 जुलाई को हुए हमले में लापता एक भारतीय नाविक की मौत की भी पुष्टि हुई है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के इलाकों में हुए हमलों में अब तक कम से कम 14 नाविकों की जान जा चुकी है।
अमेरिकी हमलों में 35 लोगों की मौत का दावा
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि हाल के अमेरिकी हवाई हमलों में 35 से अधिक लोगों की मौत हुई है। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसके हमले केवल सैन्य प्रतिष्ठानों और मिसाइल ढांचों तक सीमित हैं।
कतर पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री, कूटनीतिक हलचल तेज
बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अचानक कतर की राजधानी दोहा पहुंच गए हैं। वह कतर के पूर्व अमीर हमद बिन खलीफा अल थानी के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस दौरे को क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि खाड़ी देशों के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें तेज हो सकती हैं।
नेतन्याहू पहली बार अमेरिका जाएंगे
ईरान के साथ हालिया सैन्य संघर्ष के बाद पहली बार इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू शनिवार को अमेरिका का दौरा करेंगे। वह दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि देने के लिए जा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे के दौरान अमेरिका-इजराइल सुरक्षा सहयोग और ईरान के मुद्दे पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।
ईरान ने पड़ोसी देशों को दिया भरोसा
हालांकि लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपने पड़ोसी देशों को आश्वस्त करने की कोशिश भी की है। ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा कि तेहरान का क्षेत्र के किसी भी इस्लामी देश या पड़ोसी राष्ट्र से टकराव का इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा से क्षेत्रीय सहयोग और भाईचारे की नीति पर चलता रहा है, लेकिन देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।