उटंगन हादसा: आगरा के डीएम बोले- यह मेरे जीवन का सबसे कठिन और भावनात्मक रेस्क्यू ऑपरेशन था

आगरा। खेरागढ़ क्षेत्र के कुसियापुर गांव में उटंगन नदी में 12 युवाओं के डूबने के हादसे के बाद चला रेस्क्यू अभियान प्रशासनिक दृढ़ता, तकनीकी सूझबूझ और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम रहा। देवी प्रतिमा विसर्जन के दौरान नदी में डूबे 12 युवकों को खोज निकालने का कार्य जिला प्रशासन, और पुलिस के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती था। चारों ओर फैली निराशा, नदी का तेज बहाव, पानी की गहराई और लगातार असफल प्रयासों के बीच ऑपरेशन उटंगन को प्रशासन ने एक रणनीतिक युद्ध की तरह संचालित किया। लगातार मौके पर डटे रहे जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी कहते हैं, यह मेरे जीवन का अब तक का सबसे कठिन और भावनात्मक रेस्क्यू ऑपरेशन था।

Oct 7, 2025 - 22:34
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उटंगन हादसा: आगरा के डीएम बोले- यह मेरे जीवन का सबसे कठिन और भावनात्मक रेस्क्यू ऑपरेशन था

इस पूरे मिशन ने न केवल प्रशासनिक टीम की दक्षता को उजागर किया, बल्कि संकट की घड़ी में संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल भी पेश की। सबसे अच्छी बात यह रही कि ऒपरेशन के दौरान प्रशासन, पुलिस, आर्मी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला।

सूझ ही नहीं रहा था कि रेस्क्यू कहां से शुरू करें

कुसियापुर गांव में हुई त्रासदी के बाद जब 12 युवक नदी में लापता हुए, तो रेस्क्यू टीमों के सामने यह साफ नहीं था कि तलाश कहां से शुरू की जाए। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी बताते हैं कि पहले दिन हमें अंदाज़ा ही नहीं था कि युवकों को किस हिस्से में ढूंढा जाए। नदी की गहराई, तेज बहाव और मिट्टी की परतों के कारण ऑपरेशन बेहद जटिल था। हादसे वाले दिन ही तीन शव तो बरामद कर लिए गये थे, लेकिन जीतोड़ कोशिशों के बाद भी नौ शवों का पता नहीं चल पा रहा था।

नदी का बहाव रोका और अस्थायी बांध बनाया गया

लगातार 24 घंटे की माथापच्ची और कई विफल प्रयासों के बाद यह निर्णय लिया गया कि नदी में बहाव को रोका जाए, ताकि पानी का स्तर घटे और तलहटी में दबे शवों को खोजा जा सके। इसके लिए भरतपुर, करौली और धौलपुर जिलाधिकारियों से तत्काल संपर्क स्थापित कर यह अनुरोध किया गया कि कुछ समय तक नदी में पानी न छोड़ा जाए। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों की मदद से नदी पर अस्थायी मिट्टी का बांध तैयार कराया गया, जिससे जल स्तर नियंत्रित हुआ। नदी का तल जलविहीन होने पर ही 20 से 30 फीट की गहराई में दलदल में शव मिले।

डीएम ने बताया कि सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की टीमें निरंतर अभियान में जुटी हुई थीं, लेकिन प्रारंभिक प्रयासों में सफलता नहीं मिली। इसके बाद दिशा बदलते हुए एक नया प्रयोग किया गया। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मर्चेंट नेवी विशेषज्ञों से संपर्क करें और पता लगाएं कि क्या कोई ऐसी तकनीक संभव है जिससे पानी और मिट्टी के भीतर मौजूद शवों का पता लगाया जा सके।

पहला शव मिलते सभी की उम्मीदें जाग उठी थीं

इसी दौरान शवों की खोज के लिए कई प्रयोग किए गए। मेटल रॉड्स, प्रेशर पाइप्स और कम्प्रेशर एयर तकनीक का उपयोग किया गया। अंतिम चरण में जब कम्प्रेशर के माध्यम से हवा से मिट्टी हटाकर तलहटी को साफ किया गया, तब पहले शव के मिलने के साथ उम्मीदें फिर से जाग उठीं। पहला शव मिलते ही पूरा प्रशासनिक दल भावुक हो उठा। हमने सोचा अब बाकी भी मिल जाएंगे, और हुआ भी वही,” जिलाधिकारी ने कहा।

लगातार प्रयासों के बाद इसी तकनीक से बीते दिन दो शव निकाले गए और मंगलवार को चारों लापता युवकों के शव मिलने के साथ ही ऑपरेशन उटंगन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। जिलाधिकारी ने कहा कि हमें कई बार लगा कि शायद अब कोई संभावना नहीं बची, लेकिन टीमों ने हिम्मत नहीं हारी। अंततः नतीजे सामने आए।

मुख्यमंत्री कार्यालय से हर दो घंटे पर रिपोर्ट ली जा रही थी

डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय लगातार संपर्क में था, हर अपडेट पर नजर रखी जा रही थी। यह मेरे जीवन का अब तक का सबसे कठिन और भावनात्मक रेस्क्यू ऑपरेशन था।

डीएम ने यह भी बताया कि कुछ शव मिट्टी के भीतर खड़े अवस्था में दबे हुए मिले, जिन्हें अत्यंत सावधानी से बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके प्रशासनिक करियर की सबसे कठिन परीक्षा थी।

SP_Singh AURGURU Editor