उटंगन त्रासदी: 12 युवाओं की जान लेने वाले अवैध खनन का असली गुनहगार कौन?

आगरा में खेरागढ़ थाना क्षेत्र के कुसियापुर गांव में देवी प्रतिमा विसर्जन के दौरान 12 नौजवान नदी में डूबकर मौत के शिकार हो गए। सवाल यह है कि इन मासूम जिंदगियों का गुनहगार आखिर कौन है? क्या यह केवल एक हादसा था या फिर अवैध खनन की उस काली सच्चाई का परिणाम, जिसने नदी की तलहटी को 30 से 50 फीट गहरे गड्ढों में बदल डाला? अगर गांव वाले चीख-चीख कर खनन माफिया को जिम्मेदार बता रहे हैं तो प्रशासन, पुलिस और सत्ता से जुड़े लोगों की चुप्पी आखिर क्या दर्शाती है?

Oct 6, 2025 - 19:59
 0
उटंगन त्रासदी: 12 युवाओं की जान लेने वाले अवैध खनन का असली गुनहगार कौन?
Image- Freepik

अवैध खनन का गड्ढा, मौत का जाल

गांव के लोगों का कहना है कि नदी की तलहटी में खनन माफिया ने इतने गहरे गड्ढे कर डाले थे कि विसर्जन करने गए युवकों को इसका अंदाज़ा तक नहीं हो पाया। जैसे ही वे पानी में उतरे, उनकी जिंदगियां उस गहराई में समा गईं। यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं बल्कि वर्षों से पनपी लापरवाही और अवैध खनन की देन है।

हर कोई आकंठ डूबा है इस खेल में

आगरा की नदियों में खनन रोकने की जिम्मेदारी जिनकी है, वही इसमें शामिल हैं। खनन विभाग हो, इलाका पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी हों या सत्ता पक्ष के लोग, हर कोई इस बहती गंगा में हाथ धो रहा है। आगरा का खनन माफिया इतना ताकतवर हो चुका है कि अगर कोई अधिकारी इसे रोकने की हिम्मत करता है, तो उसकी जान के लिए खतरा पैदा हो जाता है। कई बार ऐसी घटनाएं हुई हैं जब खनन माफिया ने अधिकारियों की गाड़ियों में टक्कर मारी है।

सबसे बड़ी मिलीभगत: पुलिस की भूमिका

कहा जाता है कि पुलिस की मिलीभगत के बगैर तो खनन माफिया एक बाल्टी रेत भी नदी से बाहर नहीं निकाल सकता। लेकिन हकीकत यह है कि यमुना, चंबल, उटंगन और जिले की हर नदी में खनन बेखौफ जारी है। सत्ता बदलती है, नेता बदलते हैं, लेकिन नेताओं के बेटे और रिश्तेदार तक इस गोरखधंधे में शामिल रहते हैं।

नैतिकता कहां है?

कुसियापुर त्रासदी के बाद जिम्मेदार लोग अपने चेहरे गमगीन दिखा रहे हैं। लेकिन सच यह है कि उनमें इतना नैतिक बल नहीं कि वे इस त्रासदी की जिम्मेदारी स्वीकार कर लें। अगर नदी में 30-40 फीट गहरे गड्ढे बनेंगे तो वह जानलेवा साबित होगा ही। पर खनन से होने वाली कमाई उनकी आंखें बंद कर चुकी है।

कुछ दिन का मातम, फिर वही खेल

आज 12 नौजवानों की मौत से गम का माहौल है। अफसर, नेता और विभागीय अधिकारी सब संवेदना दिखा रहे हैं। मगर कुछ दिन बीतने दीजिए, यह मामला ठंडा पड़ते ही खनन फिर से शुरू हो जाएगा, उसी बेशर्मी से। यह सिलसिला दशकों से चल रहा है और आगे भी चलता रहेगा।

यह हादसा केवल 12 परिवारों का दर्द नहीं, बल्कि उस तंत्र पर सवाल है जो खनन माफिया को संरक्षण देकर नदियों को कब्रगाह बना रहा है।

पुलिस और माफिया पर हत्या का केस दर्ज हो- शर्मा

राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमा शंकर शर्मा ने उटांगन नदी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई 12 लोगों की मौत के लिए खनन माफिया और स्थानीय पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है। श्री शर्मा ने कहा कि पुलिस चंद पैसों के लिए खनन माफियाओं को बढ़ावा देती रही, जिसके कारण नदी में गहरे गड्ढे बन गए और 12 लोगों की जान चली गई।

उन्होंने कहा कि अगर नदी में खनन नहीं हुआ होता तो यह दुर्घटना नहीं होती। इसके मद्देनजर, श्री शर्मा ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर स्थानीय पुलिस और खनन माफियाओं के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। साथ ही मृतकों के परिवारों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा और प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई है।

श्री शर्मा ने चेतावनी दी कि अगर यह मांग पूरी नहीं हुई तो दीवानी कचहरी के पास भारत माता की मूर्ति के समक्ष एक दिन का शांतिपूर्ण धरना-उपवास कर जोरदारी से न्याय की मांग उठाई जाएगी।

SP_Singh AURGURU Editor