हमारे डीएनए में वेद और रक्त में संस्कृति, केवल बोलने से काम नहीं चलेगा आर्यत्व को जीना होगा : स्वामी रामदेव, आगरा में आर्य महासम्मेलन का वैचारिक विस्फोट, पाखंड और जड़ता पर तीखा प्रहार

आगरा। हम सूर्य की तरह तेजस्वी और चंद्र की तरह शीतल बनें। यही आर्यत्व है। हमारे डीएनए में वेद समाहित हैं और रक्त में पूर्वजों की संस्कृति, सभ्यता और संपूर्ण विरासत प्रवाहित हो रही है। यह उद्गार स्वामी रामदेव ने आर्य केंद्रीय सभा द्वारा कमला नगर स्थित जनक पार्क में आयोजित आर्य महासम्मेलन के दूसरे दिन हरिद्वार से वर्चुअल संबोधन में व्यक्त किए। उन्होंने दो टूक कहा कि आर्यत्व कोई नारा नहीं, बल्कि आहार, वाणी, व्यवहार और आचरण में जिया जाने वाला जीवन-दर्शन है। जो जिया नहीं जाता, उसे बोलना पाखंड है।

Jan 31, 2026 - 22:08
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हमारे डीएनए में वेद और रक्त में संस्कृति, केवल बोलने से काम नहीं चलेगा आर्यत्व को जीना होगा : स्वामी रामदेव, आगरा में आर्य महासम्मेलन का वैचारिक विस्फोट, पाखंड और जड़ता पर तीखा प्रहार
आगरा में आर्य केंद्रीय सभा द्वारा कमला नगर स्थित जनक पार्क में आयोजित आर्य महासम्मेलन को हरिद्वार से वर्चुअल संबोधित करते योग गुरु स्वामी रामदेव।

आर्य महासम्मेलन में मंचस्थ अतिथिगण।

स्वामी रामदेव ने कहा कि आर्यजन को अपने भीतर राम की मर्यादा, कृष्ण का योगतत्व और शिव का शिवत्व आत्मसात करना होगा। ज्ञान, निष्ठा और पुरुषार्थ के बल पर विश्व-परिवर्तन का संकल्प ही आर्य पहचान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज में अच्छे लोगों का संगठन और असामाजिक शक्तियों का दृढ़ विरोध समय की मांग है। जीवन में स्पष्टता और साहस के बिना धर्म और राष्ट्र की रक्षा संभव नहीं।

स्वामी दयानंद ने चरित्र निर्माण पर बल दिया

स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत का निर्माण महर्षि दयानंद सरस्वती के स्वप्नों के अनुरूप होना चाहिए, जहां राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक पाखंड, जात-पात और आडंबर का कोई स्थान न हो। पाखंड का विरोध केवल मूर्तिपूजा तक सीमित नहीं, जड़ता और दिखावे के विरुद्ध भी है। महर्षि दयानंद ने मंदिर नहीं तोड़े, चरित्र निर्माण पर बल दिया।

हिंदुत्व खतरे में नहीं, तैयारी की कमी है

उन्होंने कहा कि हिंदुत्व, वेद या आर्य समाज खतरे में नहीं हैं। खतरा आत्मतैयारी की कमी का है। वेद-विरोध और पाखंड की जड़ों को उखाड़ने का समय है। आज भी विश्व में सनातन वैदिक हिंदुओं की संख्या सर्वाधिक है, हम संख्या में कम नहीं।

संगठित समाज का उदाहरण

स्वामी रामदेव ने कहा कि मुस्लिम समाज में मजदूर वर्ग भी नियमित जकात देता है। मध्यमवर्ग अतिरिक्त धन से मदरसे, मस्जिद और धर्म-प्रसार करता है। ईसाई समाज भी विश्वभर में संगठित रूप से सक्रिय है। हिंदू समाज संगठन में कमजोर रहा, परिणामस्वरूप लोग अन्य मतों या नास्तिकता की ओर जा रहे हैं। स्वधर्म की रक्षा त्याग और संघर्ष मांगती है। इस कीमत से पीछे नहीं हटना चाहिए।

वेद, योग और नारी शिक्षा पर गहन मंथन

सम्मेलन में वेद, अष्टांग योग और नारी शिक्षा को समाज-निर्माण का आधार बताते हुए वक्ताओं ने विचार रखे।
मुख्य अतिथि ठाकुर विक्रम सिंह ने कहा कि वेद मानवता को समानता, सदाचार और कर्मप्रधान जीवन का संदेश देते हैं, जो आज और अधिक प्रासंगिक है। आर्य समाज समाज सुधार, शिक्षा प्रसार और राष्ट्रहित में सदैव अग्रणी रहा है।

कन्या गुरुकुल सासनी की अधिष्ठाता आचार्या पवित्रा ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने नारी शिक्षा को समाज सुधार की धुरी बताया। गुरुकुल परंपरा के माध्यम से कन्याएं वेद, विज्ञान और संस्कारयुक्त शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। नारी सशक्तिकरण नारों से नहीं, चरित्र, शिक्षा और संस्कार से होता है।

स्वामी आर्यवेश ने अष्टांग योग को शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शुद्धि के जरिए आत्म-मुक्ति का मार्ग बताया। यम-नियम से सत्य, अहिंसा और संयम विकसित होता है। योग साधना नहीं, जीवन जीने की कला है।
आचार्य विष्णुमित्र वेदारथी ने वेदों के सिद्धांतों, सामाजिक सुधार और नैतिक जीवन मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रधान सीए मनोज खुराना ने बताया कि सम्मेलन का आरंभ सुबह योग, प्राणायाम, पंचकुंडीय यज्ञ और ध्यान से हुआ। परिसर में आर्य समाज साहित्य की प्रदर्शनी लगी। सायं सत्र में महर्षि दयानंद पर आधारित फिल्म दिखाई गई। जनक पार्क “जो बोले सो अभय” और “वेद की ज्योति जलती रहे” के उद्घोष से गूंजता रहा। भजनोपदेशक पं. कुलदीप आर्य ने वैदिक भजनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। संचालन आर्य अश्वनी ने किया।

इस अवसर पर संयोजक प्रदीप कुलश्रेष्ठ, मंत्री वीरेंद्र कनवर, कोषाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल, उमेश पाठक, अनुज आर्य, विकास आर्य, ऋषि मोहन ठाकुर, नमिता शर्मा, विद्या गुप्ता, रंगलाल गौतम, भारत भूषण शर्मा, अनूप आर्य, देव सरन, यतेंद्र आर्य, प्रदीप डेम्बल, प्रेमा कनवर, सुमन कुलश्रेष्ठ, वंदना आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्यजन उपस्थित रहे।

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SP_Singh AURGURU Editor