वायरल ऒडियो से उठा सवाल- भाजपा में अध्यक्षों की औकात नहीं तो फिर कौन बना रहा पदाधिकारी

आगरा। महानगर भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को लेकर इन दिनों एक वायरल ऑडियो ने कार्यकर्ताओं में हलचल मचा दी है। बल्केश्वर मंडल की कार्यकारिणी से जुड़े इस विवाद में सवाल उठ रहे हैं कि अगर महानगर अध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं है, तो आखिर यह तय कौन कर रहा है कि मंडल की कमेटियों में किसे स्थान मिले और किसे नहीं।

Oct 15, 2025 - 20:45
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वायरल ऒडियो से उठा सवाल- भाजपा में अध्यक्षों की औकात नहीं तो फिर कौन बना रहा पदाधिकारी
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आगरा। महानगर भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को लेकर इन दिनों एक वायरल ऑडियो ने कार्यकर्ताओं में हलचल मचा दी है। बल्केश्वर मंडल की कार्यकारिणी से जुड़े इस विवाद में सवाल उठ रहे हैं कि अगर महानगर अध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं है, तो आखिर यह तय कौन कर रहा है कि मंडल की कमेटियों में किसे स्थान मिले और किसे नहीं।

मामला उस समय उभर कर सामने आया जब पूर्व पार्षद अमित ग्वाला और वरिष्ठ कार्यकर्ता सुनीत गोयल के बीच हुई बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस बातचीत में दोनों के बीच मंडल कार्यकारिणी के एक सदस्य को लेकर तीखी बहस सुनाई देती है। बातचीत में यह निष्कर्ष मिलता है कि मंडल कार्यकारिणी में पद तय करने की प्रक्रिया अब संगठन के घोषित पदाधिकारियों से हटकर किसी अन्य प्रभावशाली हस्ती के हाथों में चली गई है।

फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ विवाद

ऑडियो क्लिप के अनुसार सुनीत गोयल ने सिर्फ फेसबुक पर एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी थी, जिस पर अमित ग्वाला ने कड़ी नाराजगी जताई। ग्वाला ने यह कहते हुए आपत्ति की कि जिस व्यक्ति (मानव) को लेकर प्रतिक्रिया दी गई है, वह उनका छोटा भाई है और उनकी पोस्ट पर टिप्पणी करना ठीक नहीं।

 उन्होंने गोयल को अपनी पोस्ट डिलीट करने का आदेश दिया और अगली सुबह पार्क में मिलने के लिए कहा।
बातचीत के दौरान ग्वाला यह भी कहते सुने गए कि तुम्हारी चिंता हम करेंगे ना...हम काहे के लिए बैठे हैं। तुम बताओ कौन-सा पद चाहिए तुम्हें। मंडल अध्यक्ष या महानगर अध्यक्ष की क्या औकात है कुछ देने की।

इस कथन ने भाजपा संगठन के भीतर उस चुप्पी को तोड़ दिया है, जिसमें कार्यकर्ता लंबे समय से मंडल इकाइयों में नाम तय करने को लेकर असंतोष जता रहे थे।

कार्यकर्ताओं में उठ रहे सवाल

वायरल ऑडियो के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर ऐसे कौन लोग हैं जिनकी सिफारिश पर मंडल कार्यकारिणी बन रही है। कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि निर्णय अध्यक्षों के हाथ में नहीं हैं तो फिर यह संगठनात्मक परंपराओं का उल्लंघन है।

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि इस विवाद से गहरा असंतोष है, क्योंकि इससे संगठन की साख पर प्रश्नचिन्ह लगा है। वहीं, कुछ कार्यकर्ता इसे संगठन की अंदरूनी गुटबाजी का परिणाम बता रहे हैं। पूछे जाने पर अमित ग्वाला कहते हैं कि यह विरोधियों की उन्हें फंसाने की चाल है। 

संगठन की छवि पर असर

इस ऑडियो विवाद ने भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस मामले में शीघ्र जांच नहीं हुई तो यह “आंतरिक लोकतंत्र” के उस मॉडल को कमजोर कर देगा, जिस पर पार्टी अब तक गर्व करती आई है।

फिलहाल, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इस पूरे मामले पर औपचारिक रूप से चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि अगर मंडल और महानगर अध्यक्ष पदाधिकारी तय नहीं कर रहे, तो फिर कर कौन रहा है?