वृंदावनः भक्तमाली जी का प्रिया-प्रियतम मिलन महोत्सव भक्ति, विद्वता और रसोपासना के संग आरम्भ  

वृंदावन। ब्रज की संत रसोपना के अग्रणी संत पं. जगन्नाथ प्रसाद भक्तमाली का त्रिदिवसीय 41 वाँ प्रिया प्रियतम मिलन महोत्सव ज्ञान गुदड़ी स्थित श्री जानकी भवन में विभिन्न आध्यात्मिक सांस्कृतिक एवं वैदिक कार्यक्रमों के साथ प्रारम्भ हुआ।

Aug 26, 2025 - 22:42
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वृंदावनः भक्तमाली जी का प्रिया-प्रियतम मिलन महोत्सव भक्ति, विद्वता और रसोपासना के संग आरम्भ   
संत पं. जगन्नाथ प्रसाद भक्तमाली का त्रिदिवसीय 41 वाँ प्रिया प्रियतम मिलन महोत्सव के मौके पर श्रद्धासुमन अर्पित करते संत।

प्रातः से ही भक्तमाली जी की साधना स्थली ताड़‌वाली कुंज में भजन-कीर्तन एवं भक्तमाल समाज का सामूहिक गायन संत-महंतों द्वारा प्रारम्भ हुआ तथा मध्याह्न भक्तमाल जी की रस वर्षणी कथा का श्री भरत दास जी भक्तमाली द्वारा श्रद्धालुओ‌ ने श्रृवण किया।

सायं काल विधिवत त्रिदिवसीय प्रिया- प्रियतम मिलन महोत्सब का उद्‌घाटन ब्रज की रसोपासना के अनन्य संत श्री गोरे लाल जी की कुंज के महंत किशोर दास महाराज, नाभाद्वाराचार्य सुतीक्ष्ण दास महाराज व अन्य महानुभावों द्वारा भक्तमाली जी के चित्रपट का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर बृहद संत-विद्वत संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता करते हुए महंत किशोर दास महाराज ने कहा कि पं० जगन्नाथ प्रसाद भक्तमाली ब्रज की संत विभूति थे। उन्होंने व्रज की निकुंजों में श्यामा श्याम की अनुभूति की थी। वे परम विद्वान एवं भक्तमाल के सरस गायक संत थे। भक्तमाल की गायन शैली के प्रथम वक्ता के रूप में व्रजवासी आज भी आपका स्मरण पूर्ण श्रद्धा से करते हैं। वे संत समाज के लिए प्रेरणा दायक रहे।

महंत सुतीक्ष्ण दास ने कहा कि पंडित जी की वाणी में अपरमित मधुरता एवं हृदय में उदारता थी। उनका चिन्तन, मनन, गुणानुबाद परमात्मा की ही आराधना है। उन्होंने कहा कि यदि प्राणी अपना कल्याण चाहता है तो उसे संत की शरण में जाना चाहिए।

बाबा बलराम दास ने कहा कि आचार्यों एवं गुरुजनों के प्रति श्रद्धा का भाव हृदय मे भक्ति का अंकुरण करता है और महापुरुष भगवान से मिलन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

महंत रामदास जी महाराज ने कहा कि जो भक्तमाली जी की शरण में आया उसी का कल्याण हो गया। नरहरि दास जी, अयोध्या ने कहा कि भक्तमालीजी व्रज के तात्विक स्वरूप से भली भांति परिचित थे। व्रजवासियों से उनका विशेष लगाव था। संत समाज में उनकी अनोखी प्रतिष्ठा थी। ब्रजवासियों के प्रति उनका समर्पण का भाव था।

इस अवसर पर श्याम प्रकाश, बक्सर, राम कृपालु दास जी भक्तमाली, ने भी श्री भक्तमाली जी को श्रृद्धा सुमन अर्पित किए। संगोष्ठी का संचालन संत रामसंजीवन दास महाराज ने किया।

रात्रि 8 बजे से स्वामी राम बल्ल्भ शर्मा की प्रसिद्ध रासलीला मंडली द्वारा भक्तजनों ने प्रथम मिलन लीला का अवलोकन किया। प्रिया- प्रियतम के श्रंगार सौन्दर्य, ब्रजरस प्रिया प्रियतम के एक प्राण दो देह के मर्म से ओतप्रोत माधुर्य मय लीला का अवलोकन कर सभी श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। रात्रि पर्यन्त प्रिया प्रियतम प्रथम मिलन लीला का सभी दर्शकों ने भरपूर आनन्द लिया।

महोत्सव में श्री गोपाल शर्मा, संजय शर्मा, शशांक शर्मा पार्षद, इंद्रेश शर्मा, राम नारायण, राधा रमन पाठक, आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। व्यवस्था सहयोगी श्री मृदुल शर्मा, अभिराज शर्मा, प्रद्युम्न शर्मा, वासु शर्मा, रमेश विश्वकर्मा, प्रेम सैनी, आदि रहे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ अनूप शर्मा ने व धन्यवाद ज्ञापन पंडित रसिक शर्मा ने किया।

SP_Singh AURGURU Editor