मुस्लिम भाई सूर्य नमस्कार करें तो क्या बिगड़ेगा, सऊदी अरब और रूस के उदाहरण देकर बोले होसबाले
गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर गोरखपुर के खोराबार में आयोजित हिंदू सम्मेलन में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने सामाजिक एकता, पर्यावरण चेतना और सांस्कृतिक समन्वय पर जोर दिया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक धर्म तक सीमित विषय नहीं है। यदि मुस्लिम समाज के भाई भी नदी-पूजन, धरती और वृक्षों के सम्मान जैसे प्रकृति-केंद्रित आचरण अपनाते हैं या सूर्य नमस्कार करते हैं, तो इससे किसी की धार्मिक पहचान को कोई नुकसान नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रकृति के प्रति सम्मान रखना किसी भी व्यक्ति को अपनी इबादतगाह या धार्मिक आस्थाओं से दूर नहीं करता।
गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर गोरखपुर के खोराबार में आयोजित हिंदू सम्मेलन में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने सामाजिक एकता, पर्यावरण चेतना और सांस्कृतिक समन्वय पर जोर दिया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक धर्म तक सीमित विषय नहीं है। यदि मुस्लिम समाज के भाई भी नदी-पूजन, धरती और वृक्षों के सम्मान जैसे प्रकृति-केंद्रित आचरण अपनाते हैं या सूर्य नमस्कार करते हैं, तो इससे किसी की धार्मिक पहचान को कोई नुकसान नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रकृति के प्रति सम्मान रखना किसी भी व्यक्ति को अपनी इबादतगाह या धार्मिक आस्थाओं से दूर नहीं करता।
होसबाले ने कहा कि हिंदू धर्म प्रकृति-पूजा और सर्वसमावेशी दृष्टि की परंपरा का वाहक रहा है, जो समाज के हर वर्ग की बात करता है। उन्होंने विभिन्न देशों के उदाहरण देते हुए सांस्कृतिक सौहार्द का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में मुसलमानों ने मंदिर निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराई, वहीं रूस में चर्च से जुड़े लोगों ने भी मंदिर निर्माण के लिए स्थान दिया। उनके अनुसार, इतिहास में अंग्रेजों की “फूट डालो, राज करो” की नीति ने समाज को बांटा, लेकिन अब समय एकजुट होने का है।
संघ के शताब्दी वर्ष के तहत गोरक्ष प्रांत के 10 जिलों में 1900 स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। यह व्यापक जनसंपर्क अभियान 14 दिसंबर से 11 जनवरी तक चलेगा, जिसमें डोर-टू-डोर संपर्क के जरिए हर परिवार की सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। उद्देश्य है—हिंदू समाज को संगठित करना, सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना और सामाजिक समरसता का संदेश घर-घर तक पहुंचाना।
इसी क्रम में आयोजित कार्यक्रम में दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, “हिंदू जागेगा तो विश्व जागेगा, मानव का विश्वास जागेगा।” यह संदेश केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानवीय और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का आह्वान है।