जब आगरा के जिलाधिकारी ने दिव्यांगों के बीच जमीन पर बैठकर सुनी उनकी हर व्यथा
आगरा। मानवीयता की सबसे बड़ी पहचान संवेदनशीलता होती है, और यह नज़ारा आज आगरा कलक्ट्रेट में उस समय दिखा जब जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी दिव्यांगों के बीच पहुंचकर उनके साथ ज़मीन पर बैठ गए। अपनी समस्याओं को लेकर धरने पर बैठे दिव्यांगजन पहले तो चौंके, फिर गदगद हो उठे। उनकी आंखों में यह अहसास साफ झलक रहा था कि उनकी तकलीफ़ को अब वाकई गंभीरता से सुना जाएगा।
कलक्ट्रेट प्रांगण में दिव्यांगजन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना दे रहे थे। गर्म फर्श पर चटाई बिछाकर वे बैठे हुए थे और उम्मीद लगाए थे कि उनकी पीड़ा सुनी जाएगी। तभी जिलाधिकारी खुद वहां आ पहुंचे। किसी ऊंचे मंच या कुर्सी पर बैठने की बजाय वे सीधे फर्श पर उतर गए और दिव्यांगों के बीच बैठकर उनकी बातें ध्यान से सुनने लगे। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू गया।
जिलाधिकारी ने उनसे मांगपत्र लिया और आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराया जाएगा। उन्होंने मौके पर मौजूद अपर जिलाधिकारी (नगर) को निर्देशित किया कि सभी बिंदुओं पर गंभीरता से कार्यवाही कर समाधान सुनिश्चित किया जाए।
धरना दे रहे दिव्यांगों ने जिलाधिकारी के इस व्यवहार को मानवीयता की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें भरोसा हुआ कि प्रशासन उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं करेगा। वहीं, आसपास मौजूद लोगों ने भी जिलाधिकारी की इस सादगी और संवेदनशीलता की सराहना की।
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी का यह मानवीय रूप न केवल प्रशासनिक कार्यशैली की झलक दिखाता है बल्कि यह भी साबित करता है कि जब नेता और अधिकारी जनता के दुख-दर्द को नज़दीक से समझते हैं तो समस्याओं के समाधान की राह और आसान हो जाती है।