जहां शब्दों ने सीखा उड़ना: आगरा में डॉ. कुमार विश्वास की कार्यशाला से निकले भावी मंच-विजेता
प्रख्यात कवि डॊ. कुमार विश्वास की केवीशाला भविष्य के कवियों की प्रयोगशाला बनने जा रही है। हाल ही में आगरा में हुई ‘केवीशाला’ को केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि हिंदी कविता की नई पौध के लिए सृजन और संस्कार की प्रयोगशाला के रूप में देखा जा रहा है। इसे काव्य-जगत में गुणवत्ता, गंभीरता और गरिमा लौटाने की एक सशक्त पहल माना जा रहा है।
-कविता केवल मंच की नहीं, आत्मा की आवाज है, जो वृक्ष नई कोंपलों का स्वागत नहीं करते, वे ठूंठ रह जाते हैं- डॉ. कुमार विश्वास
आगरा। ताज नगरी बीते सप्ताह हिंदी कविता के नए सूर्योदय की साक्षी बनी। शहर के प्रतिष्ठित पंचसितारा होटल ताज आगरा में 28 जून से 04 जुलाई तक आयोजित ‘केवीशाला’ नामक विशेष काव्य-लेखन एवं मंचीय प्रस्तुति कार्यशाला ने देश भर के युवा कवि-कवयित्रियों को एक नई पहचान देने का कार्य किया।
इस सात दिवसीय अनूठी कार्यशाला का आयोजन डिजिटल खिड़की एवं विश्वास ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसका नेतृत्व स्वयं युगकवि डॉ. कुमार विश्वास ने किया। कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों से चयनित 19 प्रतिभागी शामिल हुए, जिनका चयन एक वर्ष तक चली राष्ट्रीय स्तर की लंबी स्क्रीनिंग प्रक्रिया के उपरांत हुआ था।
प्रतिभा को तराशना, केवल मंच देना नहीं होता- डॉ. विश्वास
कार्यशाला का उद्देश्य न केवल उभरती प्रतिभाओं को मंच देना था, बल्कि उन्हें काव्य-जगत की बारीकियों, मंचीय अनुशासन, प्रस्तुति की शुद्धता और सामाजिक मर्यादा से भी परिचित कराना था। डॉ. विश्वास ने प्रतिभागियों को कविता के शिल्प, प्रस्तुति की गरिमा और कवि-सम्मेलन की नैतिकता पर गहन प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने स्पष्ट कहा, जो वृक्ष नई कोंपलों का स्वागत नहीं करते, वे ठूंठ रह जाते हैं। कविता केवल मंच की नहीं, आत्मा की आवाज है। मंच पर सफलता केवल शब्दों से नहीं, आपके चरित्र, दृष्टिकोण और समर्पण से आती है।
विशेषज्ञों की टीम ने कविता को बनाया जीवंत अनुभव
डॉ. कुमार विश्वास के साथ हिंदी काव्य-जगत के प्रतिष्ठित नामों ने भी कार्यशाला में सहभागिता की। कुलदीप अंगार ने छंदों की महत्ता और काव्य संरचना की बारीकियां बताईं। ज्ञान प्रकाश आकुल ने गीत के गूढ़ तत्वों और नवीन रचनात्मक प्रयोगों से अवगत कराया। रमेश मुस्कान, सुदीप भोला व दिनेश बावरा ने हास्य-व्यंग्य की सूक्ष्मताओं से परिचित कराया। कविता तिवारी ने ओजस्वी भाषा, राष्ट्रभाव और तेजस्विता को कविता का केंद्र बताया। वहीं, स्वर्ण स्वर भारत फेम गायिका अंकिशा श्रीवास्तव ने सातों दिन प्रतिभागियों को मंचीय प्रस्तुति के लिए लय, स्वर और संवाद-अभिव्यक्ति की व्यावहारिक शिक्षा दी।
प्रशिक्षण से प्रस्तुति तक: कवियों का मंचीय पदार्पण
कार्यशाला के अंतिम दो दिन, 2 व 3 जुलाई को, प्रतिभागियों को कवि-सम्मेलन के मंच पर प्रस्तुति का अवसर दिया गया। आगरा के एक अन्य पंचसितारा होटल में आयोजित भव्य कवि-सम्मेलन में डॉ. कुमार विश्वास के संचालन में सभी चयनित कवि-कवयित्रियों ने अपना काव्य-पाठ प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों, सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों और शहर के साहित्य-प्रेमियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। मंच पर पहली बार उतरे कई प्रतिभागियों की प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली रही कि कई वरिष्ठ अतिथियों ने उन्हें भावी मंचों पर आमंत्रित करने की घोषणा की।
केवीशाला से अनुबंध तक: सपना जो सच हुआ
कार्यशाला में समर्पित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 15 प्रतिभागियों के साथ ‘डिजिटल खिड़की’ ने स्थायी अनुबंध किया है। इन कवियों को देशभर के मंचों, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और लाइव शो में प्रस्तुति के अवसर दिए जाएंगे।
शेष 4 प्रतिभागियों को लेखन और प्रस्तुति पर और परिश्रम करने का सुझाव देते हुए संस्था ने आश्वस्त किया है कि तय मापदंड पूरे होते ही उनके साथ भी अनुबंध किया जाएगा।
डॉ. विश्वास ने स्पष्ट कहा कि हम मंच पर केवल प्रतिभा नहीं, संवेदना, अनुशासन और मूल्यों को स्थापित करने जा रहे हैं।
निःशुल्क सुविधा, सजीव सीख, स्थायी पहचान
विशेष उल्लेखनीय बात यह रही कि प्रतिभागियों के रहने, खाने, आने-जाने की सभी व्यवस्थाएं ‘विश्वास ट्रस्ट’ द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। प्रतिभागियों में कई देश के सुदूर गांवों और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों से आए थे, जिनके लिए यह अवसर किसी स्वप्न से कम नहीं था।