फव्वारा दवा बाजार की 60% दुकानों के शटर क्यों गिरे? अब ये सभी जांच के दायरे में आने जा रहे

आगरा। शहर का फव्वारा स्थित दवा बाजार, जो पूरे ब्रज क्षेत्र के लिए दवाओं की सप्लाई का बड़ा केंद्र माना जाता है, अब शासन-प्रशासन की कड़ी निगरानी में आ गया है। अगस्त के अंतिम सप्ताह में ड्रग विभाग और एसटीएफ की संयुक्त टीम की छापेमारी के दौरान लगभग 60 प्रतिशत दुकानदारों द्वारा अपने शटर गिरा लेना और कई दिनों तक दुकानें बंद रखना यह संकेत दे रहा है कि आगरा में नकली और प्रतिबंधित दवाओं का कारोबार कितने गहरे तक फैला हुआ हो सकता है। अब शासन ने ऐसे सभी दुकानदारों की जांच का ऐलान कर दिया है।

Sep 4, 2025 - 18:51
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फव्वारा दवा बाजार की 60% दुकानों के शटर क्यों गिरे? अब ये सभी जांच के दायरे में आने जा रहे

छापेमारी और दुकानदारों की घबराहट से शक के दायरे में

जब ड्रग विभाग और एसटीएफ की टीम ने फव्वारा दवा बाजार में छापा मारा था, तो पूरे बाजार में हड़कंप मच गया था। छापे की भनक मिलते ही करीब 60 प्रतिशत दुकानदारों ने आनन-फानन में शटर गिरा दिए। इतना ही नहीं, इन दुकानदारों ने तीन से चार दिन तक अपनी दुकानें भी नहीं खोलीं। जबकि कई व्यापारी ऐसे भी थे जो बेखौफ होकर अपनी दुकानें खोलकर कारोबार करते रहे।

आनन-फानन में दुकानें बंद करने वाले रडार पर

छापेमारी होने पर दुकानें बंद कर देने वाले सभी दवा कारोबारी अब जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुके हैं। दो दिन पहले आगरा दौरे पर आईं औषधि विभाग की विशेष सचिव रेखा एस. चौहान भी साफ शब्दों में कह चुकी हैं कि छापेमारी के दौरान जिन दुकानदारों ने अपनी दुकानों के शटर गिराए थे, उन सभी की जांच होगी। उनका कहना था कि अगर कारोबार ईमानदारी और नियमों के मुताबिक हो रहा था तो शटर गिराने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इस रवैये ने खुद ही शक की सुई दुकानदारों की ओर मोड़ दी है।

अब तक चार भेजे जा चुके हैं जेल

अब तक हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल स्टोर के संचालक पकड़े जा चुके हैं। चार आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। यह घटनाक्रम साफ इशारा करता है कि नकली दवाओं का कारोबार किसी एक-दो दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार बाजार के अन्य हिस्सों में भी फैले हो सकते हैं।

बाजार पर मंडराते ढेरों सवाल

छापे की जानकारी होते ही 60 प्रतिशत दुकानों का आनन-फानन में बंद हो जाना इस बात का बड़ा संकेत है कि आगरा जैसे शहर में नकली दवाओं का कारोबार बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा है। दवा बाजार की छवि ही अब सवालों के घेरे में है। यह वही बाजार है जहां से हजारों रिटेलर्स जिंदगी बचाने वाली दवाएं खरीदते हैं, लेकिन यहां के हालात दवा कारोबार को शक की नजर से देखने को मजबूर कर रहे हैं।

नकली कारोबारियों की सबूत मिटाने की कोशिश

सूत्रों का यह भी मानना है कि छापेमारी होने के बाद नकली दवाओं के धंधे में लिप्त दूसरे कारोबारियों ने अपने गोदामों से नकली और अवैध दवाओं को हटाने का काम कर लिया है। ताजगंज क्षेत्र के नगला पैमा में दवाओं को जलाने की घटना को इन्हीं कारोबारी तत्वों से जोड़कर देखा जा रहा है।

शासन की गंभीरता और अगले कदम

विशेष सचिव रेखा एस. चौहान का छापेमारी के बीच आगरा पहुंचना भी इस बात का सबूत है कि शासन अब इस मुद्दे पर बेहद गंभीर है। माना जा रहा है कि जल्द ही बाकी दुकानों और उनके गोदामों की गहन जांच शुरू हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह जांच पूरी मजबूती से हुई तो और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

SP_Singh AURGURU Editor