दक्षिणी बाईपास एंट्री पॊइंट पर हादसों की तह तक क्यों नहीं जाती एनएचएआई?  

आगरा। आगरा-जयपुर हाईवे पर कल तड़के चार बजे एक ही जगह पर दो अलग-अलग समय पर पांच गाडियों के आपस में भिड़ने की दुर्घटनाओं की वजह कोहरा तो थी ही, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भी कम जिम्मेदार नहीं। हाईवे के जिस पॊइंट पर ये हादसे हुए, वह दक्षिणी बाईपास पर चढ़ने के एंट्री पॊइंट के पास है। दुर्घटनाओं की एक वजह यहां एंट्री पॊइंट से पहले संकेतक न होने के साथ रात के समय छाया रहने वाला अंधेरा भी है।

Jan 5, 2025 - 18:04
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दक्षिणी बाईपास एंट्री पॊइंट पर हादसों की तह तक क्यों नहीं जाती एनएचएआई?   
जयपुर हाईवे पर वह एंट्री पॊइंट जहां से वाहन दक्षिणी बाईपास पर चढञते हैं। यहां साइड में लगा एक छोटा सा संकेतक कोहरे में ड्राइवरों को नजर नहीं आता और वे गाड़ी लेकर आगे बढ़ जाते हैं।

-ठीक एंट्री पॊइंट पर लगा है एक छोटा सा संकेतक, यहां लगी लाइटें भी खराब होने से रात में अंधेरा रहता है

जयपुर की ओर से आने वाले भारी और हल्के वाहन हाईवे 19 (आगरा-दिल्ली राजमार्ग) पर जाने के लिए इसी एंट्री पॊइंट से दक्षिणी बाईपास पर चढते हैं। जयपुर से आते समय यह एंट्री पॊइंट तभी दिखता है जब उसके सामने पहुंच जाएं। ठीक एंट्री पॊइंट पर जरूर एक संकेतक लगा है, जो रोड साइड में है, जिसे कोई भी वाहन चालक पास आने पर ही देख सकता है। कोहरे में तो इस संकेतक को कतई नहीं देखा जा सकता। एंट्री पॊइंट से सौ-दो मीटर से सड़क के ऊपर कोई ऐसा संकेतक नहीं लगा है जिससे वाहन चालकों को पता चल सके कि दक्षिणी बाईपास पर चढ़ने का एंट्री पॊइंट आने वाला है।

इसके साथ ही पहले इस एंट्री पॊइंट पर लगी लाइटें रात में जलती थीं, जिसकी वजह से दूर से ही वाहन चालकों को पता चल जाता था कि वे दक्षिणी बाईपास के एंट्री पॊइंट पर पहुंचने वाले हैं। पिछले कुछ समय से ये लाइटें खराब पड़ी हुई हैं, जिसकी वजह से रात में यहां अंधेरा रहता है।

कल तड़के जिस समय वाहन एक-दूसरे से भिड़े, उसकी वजह भी सबसे आगे चल रहे ट्रोला के ड्राइवर का भ्रम में पड़ना रहा। ड्राइवर को दक्षिणी बाईपास पर चढ़ना था, लेकिन घने कोहरे के कारण उसे एंट्री पॊइंट दिखा ही नहीं और वह ट्रोला को लेकर थोड़ा आगे बढ़ गया। पुल दिखने पर ड्राइवर को लगा कि वह आगे बढ़ आया है तो उसने ब्रेक लगा दिए। इसी समय पीछे आती एक यात्री बस ट्रोला में जा घुसी। इससे बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

इसके तत्काल बाद पीछे से आती एक लोडर गाड़ी बस में जा घुसी। इस प्रकार यात्री दो भारी वाहनों के बीच में फंस गई। बस की खिड़कियां नहीं खुल पा रही थीं। तब पुलिस ने कटर से बस की बॊडी कटवाकर उसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला। इसके कुछ समय बाद ही इसी जगह पर दो अन्य वाहन इसी तरह से टकराए। आगे चलती गाड़ी के ड्राइवर को दक्षिणी बाईपास का एंट्री पॊइंट नहीं दिखा। गाड़ी आगे बढ़ने पर उसने भी ब्रेक लगाए और पीछे से आती दूसरी गाड़ी उसमें जा घुसी।

एक ही जगह पर हुई इन दोनों दुर्घटनाओं से एक बात तो साफ हुई कि दक्षिणी बाईपास के एंट्री पॊइंट से सौ-दो सौ मीटर पहले संकेतक न होने और लाइटें बंद रहने के कारण ड्राइवर रात के समय भ्रमित होते हैं। कोहरा होने पर तो उन्हें पता ही नहीं चल पाता, जिसका परिणाम ऐसे हादसों के रूप में सामने आता है।

जानकार लोग बताते हैं कि जयपुर हाईवे से दक्षिणी बाईपास पर बड़ी संख्या में वाहन चढ़ते हैं। हैरानी की बात यह है कि एनएचएआई के जिम्मेदारों का ध्यान इस इस ओर नहीं गया है।

SP_Singh AURGURU Editor