आगरा में दीवाली की रात हवा चली, फिर भी सामान्य स्थिति से चार गुना ज्यादा खराब थी वायु गुणवत्ता
आगरा। 20 अक्तूबर की रात यानि बीती रात जब पूरे शहर में दीवाली के मौके पर भारी आतिशबाजी की गई, उससे शहर की वायु गुणवत्ता एक बार फिर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई। शहरवासियों ने इतना बारूद फूंका कि हवा में प्रदूषण की स्थिति सामान्य से लगभग चार गुनी तक बढ़ गई। यह और भी ज्यादा बढ़ सकती थी, मगर इस बार कहानी अलग रही। दीवाली की रात तेज हवा के कारण शहर में बहुत खराब श्रेणी तक विस्फोटक स्तर का प्रदूषण नहीं बन पाया।
बता दें कि वायु की गुणवत्ता का स्तर 50 हो तो इसे स्वास्थ्य के लिहाज से सामान्य माना जाता है। आगरा में दीपावली की रात यह 190 से ऊपर जा पहुंचा जो सामान्य स्थिति से लगभग चार गुना ज्यादा था। ऐसा शाम होते ही शुरू हुई आतिशबाजी की वजह से हुआ। आगरा शहर के ज्यादातर हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ा हुआ था, लेकिन हरीपर्वत क्षेत्र में यह सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। इसके अलावा कमला नगर, आवास विकास कॊलोनी समेत शहर के दूसरे हिस्सों में भी पटाखों के कारण हवा प्रदूषित हो गई थी।
आगरा में रात्रि के शुरुआती घंटों में AQI करीब 170–190 दर्ज किया गया था, जो सामान्य रूप से लगभग चार गुना ज्यादा था। विशेष रूप से, रात 7 बजे के आसपास AQI 84 तक गिर कर मध्यम श्रेणी में था। यह दर्शाता है कि हवा के प्रवाह और मौसम के अनुकूल माहौल ने प्रदूषण के जम जाने को रोका।
प्रदूषण नियंत्रण विशेषज्ञ बताते हैं कि जब आतिशबाजी होती है तो कण (PM2.5, PM10) तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन यदि उस समय हवा चलती हो या हवा का गति-प्रवाह अच्छा हो, तो ये कण जल्दी फैल जाते हैं और लंबे समय तक एक जगह ठहर-ठहरकर वायु गुणवत्ता को बुरी तरह से प्रभावित नहीं कर पाते। इस बार आगरा में ऐसा ही हुआ।
हालाँकि AQI अच्छे स्तर तक कायम नहीं रह सका। शाम सात बजे के बाद जैसे-जैसे आतिशबाजी की गति बढ़ी, शहर की हवा भी जहरीली होने लगी। रात आठ बजते-बजते यह स्तर पुनः बढ़कर 150 से ऊपर लौट आया। आधी रात के बाद यह 190 को पार कर चुका था। इसके बाद भी यह कहा जा सकता है कि यह पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर रहा, क्योंकि तेज हवा ने प्रदूषण बढ़ाने वाले कणों को जमने नहीं दिया।
विश्लेषकों ने कहा कि दो प्रमुख कारकों ने इस राहत में योगदान दिया। पहला, शहर में आतिशबाजी का स्तर अपेक्षित से थोड़ा कम रहा और स्थानीय प्रशासनिक-निगरानी ने बेहतर काम किया। दूसरा, मौसम में हवा की गति थोड़ी बेहतर रही, जिससे उत्सर्जित धुएं-कणों का तेजी से प्रसार हुआ और इसका जमाव नहीं हो सका।
वायु-गुणवत्ता खराब होने पर बीती रात भी तमाम लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश जैसी जैसी परेशानियां हुईं। विशेषज्ञों की सलाह है कि अभी आतिशबाजी का सिलसिला चलेगा, इसलिए घर से बाहर के समय को सीमित करें और यदि संभव हो तो मास्क पहनें। साथ ही, बच्चों, वृद्धों और रोगी-वर्ग को अगले 24-48 घंटों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।