महिला आयोग का अल्टीमेटम, स्कूलों में मोबाइल से पढ़ाई बंद करो, स्कूलों को भेजे जाएंगे नोटिस

गाजियाबाद में तीन नाबालिग बच्चियों की आत्महत्या के बाद यूपी राज्य महिला आयोग ने स्कूलों की ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल आधारित होमवर्क पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग अध्यक्ष बबीता चौहान ने स्कूलों को नोटिस भेजने और मोबाइल से पढ़ाई पर रोक लगाने की बात कही है। उन्होंने इसे बच्चों की मानसिक सेहत के लिए गंभीर खतरा बताया और अभिभावकों से सतर्कता बरतने की अपील की।

Feb 5, 2026 - 19:29
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महिला आयोग का अल्टीमेटम, स्कूलों में मोबाइल से पढ़ाई बंद करो, स्कूलों को भेजे जाएंगे नोटिस
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान।

आगरा। गाजियाबाद में तीन नाबालिग बच्चियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की हृदयविदारक घटना के बाद उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने स्कूलों में चल रही ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल आधारित होमवर्क व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने इसे बच्चों की मानसिक सेहत से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बताते हुए साफ कहा है कि अब स्कूलों को बच्चों पर डिजिटल दबाव डालने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

गुरुवार को आगरा जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान महिला बंदियों से मुलाकात करने पहुंचीं आयोग अध्यक्ष ने मीडिया से बातचीत में गाजियाबाद की घटना को समाज के लिए चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि तीन बच्चियों का आत्महत्या जैसा कदम उठाना यह दर्शाता है कि बच्चों पर ऑनलाइन पढ़ाई, मोबाइल फोन और डिजिटल कंटेंट का असर किस कदर गहरा और खतरनाक हो चुका है।

आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई मजबूरी थी, लेकिन अब हालात सामान्य हो चुके हैं। इसके बावजूद कई स्कूल आज भी मोबाइल फोन के जरिए होमवर्क और पढ़ाई का दबाव बना रहे हैं। इससे बच्चे लगातार स्क्रीन से जुड़े रहते हैं, जो धीरे-धीरे डिजिटल लत, मानसिक तनाव, अवसाद और असुरक्षा को जन्म दे रही है।

उन्होंने दो टूक कहा कि बच्चों के हाथ में मोबाइल फोन उनकी उम्र, मानसिक विकास और सुरक्षा के लिहाज़ से गंभीर खतरा बनता जा रहा है। महिला आयोग अब इस दिशा में सख्त कदम उठाने जा रहा है। राज्यभर के स्कूलों को नोटिस और पत्र भेजे जाएंगे, जिनमें मोबाइल के जरिए होमवर्क और ऑनलाइन पढ़ाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाएंगे।

महिला आयोग अध्यक्ष ने ज़ोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि बच्चे फिर से क्लासरूम में किताबों से पढ़ाई करें। मोबाइल को शिक्षा का स्थायी माध्यम बनाना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। पढ़ाई के लिए वैकल्पिक, सुरक्षित और मानसिक रूप से स्वस्थ माध्यम अपनाए जाने चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखें, उनसे नियमित संवाद करें और मोबाइल फोन से यथासंभव दूर रखने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक विकास केवल स्कूलों की नहीं, बल्कि अभिभावकों और समाज की साझा जिम्मेदारी है। गाजियाबाद की घटना से सबक लेते हुए अब ठोस और निर्णायक कदम उठाने का समय आ गया है।