संस्कार भारती की 14वीं नमन काव्य गोष्ठी में काव्य, श्रद्धांजलि और सृजन का अद्भुत संगम
आगरा में संस्कार भारती द्वारा आयोजित 14वीं नमन काव्य गोष्ठी ने साहित्य, संवेदना और संस्कारों का अद्भुत समागम प्रस्तुत किया। वरिष्ठ कवियों की रचनाओं और नए सृजन ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
आगरा। संस्कार भारती, आगरा महानगर, बृज प्रान्त द्वारा राजेश गर्ग और शीला गर्ग को समर्पित 14वीं नमन काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन आर्य समाज मंदिर में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकारों और अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार विजया तिवारी, हरिमोहन सिंह कोठिया, कार्यक्रम अध्यक्ष अशोक गोयल तथा एसबीआई पेंशन एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष सुर नन्दन गर्ग विशेष रूप से उपस्थित रहे।
चित्रकार एवं कवयित्री डा. आभा सिंह गुप्ता ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।
कवियों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां
ओज कवि मोहित सक्सैना ने पिता की पीड़ा को मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया—
“बच्चों की खातिर बनते फौलाद हमारे बाबूजी,
अंत समय रह जाते बेऔलाद अभागे बाबूजी,
बाट जोहते बेटों की लाचार से बाबूजी,
कभी धूप तो सावन की बौछार से बाबूजी।”
ओज कवि हीरेन्द्र नरवार 'हृदय' ने नारी और मातृत्व की महिमा को स्वर देते हुए कहा—
“ईश्वर की सृष्टि चलाने वाली एक प्रखर अभियंता है,
लेकिन अपना अस्तित्व बचाने बेबस खड़ी अजंता है।
निज सांसों की चिंगारी से जीवन की ज्योति जलाती है,
जब पीर प्रसव की होती है, प्राणों का दांव लगाती है।
संतानें पैदा करने में जो अपना यौवन खोती है,
वो मां होती है।”
कवि प्रभुदत्त उपाध्याय ने आधुनिक जीवन की विडंबना पर तीखा व्यंग्य किया—
“आदमी से दूर कितना हो चला है आदमी,
रोज टच में है मगर टच में नहीं है आदमी।”
कवि राजीव क्वात्रा आगरावासी ने भक्ति रस में डूबी प्रस्तुति दी—
“वृंदावन का भ्रमण कर लिया,
संवारे को नमन कर लिया,
कृष्ण राधा भजन कर लिया।
रोग संताप मिटने लगे,
और सुखों का सृजन कर लिया।”
कवि संजय कुमार एडवोकेट ने बेटियों के महत्व को भावुक शब्दों में रखा—
“बेटियां पराई कहने वालों एक बात बतलाओ,
आंखों में आंसू भर विदा करने वाले, एक बात बतलाओ,
उसके जन्म से तुम्हारे मरण तक कितनी बेटियों ने मुख मोड़ा है,
तुम्हारी पुकार पर आए, फिर पराई कैसे हैं बतलाओ।”
काव्यकृति का लोकार्पण
कार्यक्रम में डा. शुभदा पाण्डेय की काव्यकृति “फूलों की नदी में नौका सा मन” का लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक में 100 प्रकार के फूलों पर आधारित कविताएं संकलित हैं। पुस्तक की समीक्षा डा. रविन्द्र वर्मा और प्रभुदत्त उपाध्याय ने प्रस्तुत की।
कवियों की लंबी श्रृंखला ने बांधा समां
गोष्ठी में डा. राजेंद्र मिलन, मीना शर्मा, अकील सिद्दीकी, अलका शर्मा, डॉ. राजेंद्र दवे, प्रणव कुमार कुलश्रेष्ठ, हरिकांत शर्मा, रवींद्र वर्मा, चंद्रशेखर शर्मा, सर्वेंद्र कुमार कुलश्रेष्ठ, विनय बंसल, राजकुमार उपाध्याय, अंकिता शर्मा त्रिपाठी, अशोक अश्रु, राकेश शर्मा, टिंकू सांवरिया, बृजेश बेबाक, डा. शेष पाल सिंह, जयपाल सिंह बामोर, कामेश मिश्रा सनसनी, डा. रेखा गौतम, डा. सुनीता चौहान, हुकम सिंह, हरीश अग्रवाल, आरती शर्मा, डा. रमा रश्मि, आचार्य उमाशंकर पाराशर, डा. राजीव शर्मा निस्पृह, सुभाष प्रजापति, प्रभाकर नारायण अग्रवाल, डा. राघवेन्द्र दुबे, डा. कुसुम चतुर्वेदी, डॉ. सुषमा सिंह, रश्मि सिंह सहित अनेक कवियों ने काव्यपाठ कर कार्यक्रम को समृद्ध किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रभुदत्त उपाध्याय एवं संजय कुमार ने किया। संयोजन नन्द नन्दन गर्ग ने तथा धन्यवाद ज्ञापन ओम स्वरूप गर्ग ने किया।
इंजी. सुरेश चन्द्र अग्रवाल, दीपक गर्ग, चंद्रशेखर शर्मा, राजीव क्वात्रा सहित अन्य सहयोगियों ने व्यवस्थाएं संभालीं।