वर्ल्ड लिज़र्ड डे: आगरा में छह माह में 50 मॉनिटर लिज़र्ड सुरक्षित, सह-अस्तित्व का संदेश

आगरा। हर साल 14 अगस्त को मनाया जाने वाला वर्ल्ड लिज़र्ड डे इस बार आगरा और आसपास के क्षेत्रों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण साबित हुआ। वाइल्डलाइफ एसओएस भारत ने मात्र छह महीनों में लगभग 50 मॉनिटर लिज़र्ड (गोह) को बचाकर लोगों में जागरूकता और मानव-सरीसर्प सह-अस्तित्व की आवश्यकता पर जोर दिया।

Aug 14, 2025 - 22:10
 0
वर्ल्ड लिज़र्ड डे: आगरा में छह माह में 50 मॉनिटर लिज़र्ड सुरक्षित, सह-अस्तित्व का संदेश
वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा मॊनिटर लिजर्ड के रेस्क्यू के कुछ चित्र।

मॉनिटर लिज़र्ड, जो कृन्तकों की आबादी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं, अक्सर अत्यधिक गर्मी या भारी वर्षा के दौरान शहरी क्षेत्रों में आ जाते हैं। शहरी वातावरण में उनकी चोटिल होने, गलत पहचान और मानव-सरीसर्प संघर्ष का जोखिम बढ़ जाता है।

इस साल वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट ने स्कूल मैदान, हाउसिंग सोसाइटियों, सार्वजनिक कार्यालयों, बगीचों और ईंटों के ढेर जैसे स्थानों से इन सरीसृपों को सुरक्षित निकालने का कार्य किया। मानसून में भारी बारिश के समय नागरिकों की कॉल्स में वृद्धि देखी गई, जिससे प्रशिक्षित टीम तुरंत रेस्क्यू और रिलीज़ कर सकी।

संरक्षण और जागरूकता पर जोर

मॉनिटर लिज़र्ड, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के अंतर्गत संरक्षित हैं। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, मॉनिटर लिज़र्ड इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाती और कृन्तकों की आबादी नियंत्रित रखती है। हर रेस्क्यू लोगों की धारणाओं को बदलने और सह-अस्तित्व का निर्माण करने का अवसर है।

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़र्वेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी. ने कहा, हर मॉनिटर लिज़र्ड का दिखना नागरिकों को जागरूक करने और विशेषज्ञों को सूचित करने का अवसर है। हमारा काम सिर्फ़ रेस्क्यू नहीं, बल्कि संरक्षण और जागरूकता का निर्माण भी है।

SP_Singh AURGURU Editor