यमुना रिवरफ्रंट पर योगी बोले-पहले नदी में नियमित जल प्रवाह जरूरी, आगरा में कृष्ण थीम पार्क का दिया प्रस्ताव
आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष पूरन डावर और सचिव के.सी. जैन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर आगरा के विकास से जुड़े चार बड़े मुद्दे उठाए। इनमें TTZ में उद्योगों पर प्रतिबंध, उत्तरी बाईपास बनने के बावजूद भारी वाहनों का शहर में प्रवेश, यमुना रिवरफ्रंट विकास से पहले नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित करने की जरूरत, और कृष्ण थीम पार्क की परिकल्पना शामिल रही। मुख्यमंत्री ने इन सभी विषयों पर गंभीरता दिखाते हुए अधिकारियों की बैठक बुलाने, आगरा मंडलायुक्त को नोडल अधिकारी बनाने, मामले की समीक्षा कराने और विस्तृत प्रस्ताव मंगाने का आश्वासन दिया। यह बैठक आगरा के औद्योगिक, पर्यावरणीय, यातायात और पर्यटन विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगरा के विकास एजेंडे पर मुख्यमंत्री से सीधी वार्ता, TTZ प्रतिबंध, भारी वाहनों का डायवर्जन, यमुना रिवरफ्रंट और कृष्ण थीम पार्क पर योगी आदित्यनाथ ने दिए त्वरित कार्रवाई के संकेत
आगरा। आगरा के समग्र विकास, औद्योगिक पुनरुत्थान, यातायात सुधार, पर्यावरण संतुलन और सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा देने के उद्देश्य से आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष पूरन डावर एवं सचिव के.सी. जैन ने रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट कर शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक प्रभाव वाले मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (TTZ) में उद्योगों पर प्रतिबंध, उत्तरी बाईपास बनने के बावजूद भारी वाहनों का शहर में प्रवेश, यमुना रिवरफ्रंट विकास, तथा आगरा में कृष्ण थीम पार्क जैसे विषय प्रमुखता से उठाए गए। मुख्यमंत्री ने सभी मुद्दों पर गंभीरता दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों के साथ शीघ्र बैठक और ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा टीटीजेड के लगभग 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना और विस्तार पर लगे प्रतिबंध का रहा। आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष पूरन डावर ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह प्रतिबंध केवल औद्योगिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर रोजगार सृजन, नए निवेश, स्थानीय उद्यमिता और क्षेत्रीय आर्थिक विकास पर पड़ रहा है। लंबे समय से उद्योग जगत इस विषय को लेकर असमंजस और दबाव की स्थिति में है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और नीरी की गाइडलाइंस का दिया हवाला
पूरन डावर ने मुख्यमंत्री को यह भी अवगत कराया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 08 दिसंबर 2021 को उद्योगों के संबंध में आदेश पारित किया था। इसके साथ ही नीरी द्वारा विभिन्न सेक्टर्स के लिए आवश्यक सेक्टोरियल गाइडलाइंस भी निर्धारित की जा चुकी हैं। इसके बावजूद 14 अक्टूबर 2024 को पुनः प्रतिबंध लागू हो गया। फाउंडेशन का कहना है कि यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि न्यायालय के समक्ष उस समय सभी आवश्यक और प्रासंगिक तथ्य प्रभावी रूप से प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
मुख्यमंत्री ने पूछा-समाधान क्या है?
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं गंभीर रुचि दिखाई और स्पष्ट रूप से पूछा कि इस स्थिति के समाधान के लिए व्यावहारिक रास्ता क्या हो सकता है। इस पर पूरन डावर ने सुझाव दिया कि मामले में प्रभावी और तथ्यात्मक पैरवी कराई जाए ताकि न्यायालय के समक्ष सभी पक्ष मजबूती से रखे जा सकें और पर्यावरणीय संतुलन के साथ औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सके।
मुख्यमंत्री का आश्वासन
मुख्यमंत्री ने इस विषय पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आश्वस्त किया कि शीघ्र ही संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी, आगरा मंडलायुक्त को शासन की ओर से नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा और वे स्वयं इस विषय से अवगत हैं तथा जल्द ही आगरा आकर इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह आश्वासन उद्योग जगत के लिए राहत और उम्मीद का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
₹400 करोड़ का उत्तरी बाईपास बना, फिर भी शहर में घुस रहे भारी वाहन
बैठक में आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के सचिव एवं अधिवक्ता के.सी. जैन ने शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर विषय उठाया। उन्होंने बताया कि लगभग ₹400 करोड़ की लागत से निर्मित 14 किलोमीटर लंबा उत्तरी बाईपास 04 दिसंबर 2025 से संचालित है, लेकिन इसके बावजूद गैर-आगरा गंतव्य वाले भारी परिवहन वाहन अब भी शहर के भीतर प्रवेश कर रहे हैं।
दुर्घटना, प्रदूषण और जाम की समस्या बरकरार
के.सी. जैन ने कहा कि बाईपास बनने का मूल उद्देश्य ही यह था कि शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम हो, लेकिन वर्तमान स्थिति में दुर्घटनाओं की आशंका और घटनाएं बढ़ रही हैं, जनहानि का जोखिम बना हुआ है, वायु प्रदूषण में वृद्धि हो रही है और मुख्य मार्गों पर जाम की समस्या बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बाहरी गंतव्य वाले ट्रकों और अन्य भारी वाहनों को अनिवार्य रूप से बाईपास से नहीं भेजा गया, तो करोड़ों की लागत से बनी यह परियोजना अपने उद्देश्य को पूरी तरह प्राप्त नहीं कर पाएगी।
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 115 के तहत अधिसूचना की मांग
इस संबंध में के.सी. जैन ने मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 115 के अंतर्गत अधिसूचना जारी कर गैर-आगरा गंतव्य भारी वाहनों को अनिवार्य रूप से उत्तरी बाईपास पर डायवर्ट करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए प्रकरण का परीक्षण कराने और आवश्यक कार्रवाई पर विचार करने का आश्वासन दिया। यह कदम लागू होता है तो शहर की यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण में बड़ा सुधार संभव माना जा रहा है।
बिना पानी के रिवरफ्रंट का लाभ अधूरा
बैठक में यमुना नदी के रिवरफ्रंट विकास का मुद्दा भी सामने आया। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद स्पष्ट और व्यवहारिक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि जब तक नदी में नियमित जल प्रवाह सुनिश्चित नहीं होता, तब तक रिवरफ्रंट विकास का कोई वास्तविक लाभ नहीं होगा। मुख्यमंत्री का यह बयान दर्शाता है कि सरकार केवल दृश्यात्मक विकास या प्रतीकात्मक परियोजनाओं के बजाय स्थायी और मूलभूत समाधान को प्राथमिकता देना चाहती है।
पहले जलधारा, फिर सौंदर्यीकरण
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि यमुना के संदर्भ में प्राथमिकता सतत एवं पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित करने की होनी चाहिए। उनका मानना है कि नदी में जल ही नहीं होगा तो रिवरफ्रंट का स्वरूप टिकाऊ और उपयोगी नहीं बन पाएगा। यह दृष्टिकोण आगरा में लंबे समय से चल रही उस बहस को नई दिशा देता है, जिसमें एक ओर रिवरफ्रंट जैसी शहरी परियोजनाएं हैं और दूसरी ओर यमुना की वास्तविक पारिस्थितिकी, जल उपलब्धता और प्रवाह का संकट।
बैठक के दौरान पूरन डावर ने आगरा को केवल ताजमहल आधारित पर्यटन शहर की पहचान से आगे ले जाकर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से कृष्ण थीम पार्क की अवधारणा प्रस्तुत की। इस परियोजना का उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक मनोरंजन अवसंरचना का ऐसा संगम तैयार करना है, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विचार का स्वागत करते हुए इसे संभावनाशील बताया और विस्तृत DPR/प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया। यह संकेत परियोजना को नीति स्तर पर प्रारंभिक स्वीकृति जैसा सकारात्मक संदेश माना जा रहा है। प्रस्तावित कृष्ण थीम पार्क में यमुना में बहु-फन नाग कालिया पर नृत्य करते श्रीकृष्ण की लीला पर आधारित जल-आधारित राइड और लेक शो। विशाल अजगर के भीतर से गुजरती हाई-स्पीड रोलर कोस्टर, जिसकी अनुमानित गति 90 किमी/घंटा और ट्रैक लंबाई 1.2 किमी प्रस्तावित है। लगभग 3000 दर्शकों की क्षमता वाला भव्य लाइव एरीना शो, जिसमें श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध की कथा का मंचन, स्पेस-थीम आधारित सस्पेंडेड रोलर कोस्टर, जो धार्मिक कल्पना और आधुनिक मनोरंजन तकनीक का मेल प्रस्तुत करेगा। 500 लोगों की क्षमता वाला इमर्सिव डोम अनुभव, जिसमें गोवर्धन धारण लीला का दृश्यात्मक और भावनात्मक प्रस्तुतीकरण शामिल हैं।
आगरा को नई पहचान देने वाली परियोजना
यदि यह परियोजना आकार लेती है, तो आगरा को केवल ऐतिहासिक स्मारकों के शहर के रूप में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक-थीम आधारित फैमिली डेस्टिनेशन और ग्लोबल कल्चरल टूरिज्म हब के रूप में भी नई पहचान मिल सकती है। इससे होटल, हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्ट, लोकल आर्ट्स, हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हो सकते हैं।
महिला समूहों से संवाद का भी आश्वासन
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि वे आगरा के महिला समूहों के साथ लखनऊ में बैठक करेंगे या अपने आगामी आगरा दौरे के दौरान उनसे सीधा संवाद स्थापित करेंगे। इसे शहर के सामाजिक विकास, महिला सहभागिता और जमीनी मुद्दों के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
विकास, सुरक्षा, पर्यावरण और पर्यटन, चारों मोर्चों पर बड़ी उम्मीदें
आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन ने बैठक के बाद उम्मीद जताई कि इन पहलों से औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी, रोजगार और निवेश का माहौल सुधरेगा, भारी वाहनों के नियंत्रण से सड़क सुरक्षा मजबूत होगी, प्रदूषण और जाम में कमी आएगी, यमुना के संरक्षण आधारित विकास मॉडल को बल मिलेगा और आगरा को वैश्विक सांस्कृतिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में नई पहचान मिल सकेगी। यह मुलाकात आगरा के लिए केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की विकास-रूपरेखा पर उच्च स्तर की निर्णायक पहल के रूप में देखी जा रही है।