योगी सरकार ने जेपीएनआईसी सोसाइटी भंग कर एलडीए को सौंपी परियोजना
लखनऊ। 2013 में समाजवादी पार्टी की सरकार द्वारा शुरू की गई जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) परियोजना भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और अपूर्ण निर्माण कार्यों का प्रतीक बन चुकी थी। शुरुआती अनुमान 265 करोड़ रुपये का था, लेकिन तीन बार बजट संशोधित कर इसे 864.99 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया गया। इसके बावजूद इमारत अधूरी रह गई और जनता को वह नहीं मिला जो मिलना था।
-अखिलेश सरकार में शुरू हुई परियोजना 265 करोड़ से 864 करोड़ तक पहुंचकर भी अधूरी ही रही
अब एलडीए करेगा जेपीएनआईसी का संचालन
3 जुलाई 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेपीएनआईसी की पूरी परियोजना लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को सौंपने का निर्णय लिया। साथ ही, सपा सरकार द्वारा गठित जेपीएनआईसी सोसाइटी को भंग कर दिया गया। अब इस परियोजना का संचालन, रखरखाव और शेष निर्माण कार्य एलडीए करेगा।
821.74 करोड़ की जिम्मेदारी, 30 साल में लौटाना होगा ऋण
अब तक शासन द्वारा जारी 821.74 करोड़ रुपये को एलडीए के पक्ष में स्थानांतरित ऋण माना जाएगा, जिसे 30 वर्षों में चुकाने की व्यवस्था की गई है। यह कदम वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करेगा और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग की ओर इशारा है।
विश्वस्तरीय सुविधाएं: जनता को मिलेगा बहुउद्देश्यीय केंद्र
जेपीएनआईसी परियोजना के तहत ऑडिटोरियम, कन्वेंशन सेंटर, ओलंपिक साइज स्विमिंग पूल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, स्पा, सैलून, लक्ज़री होटल और 750 वाहनों की मल्टी-लेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका संचालन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान की तर्ज पर किया जाएगा।
निजी सहभागिता से होगा संचालन
एलडीए को अब परियोजना को निजी एजेंसियों के साथ साझेदारी (पीपीपी मॉडल) में चलाने का अधिकार दिया गया है। लीज, राजस्व साझेदारी, और आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) के माध्यम से कार्य संपन्न होंगे, जिससे शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
ठेका, कमीशन और घोटाला
इस परियोजना की कैग रिपोर्ट में निर्माण में अनियमितताएं, बिना टेंडर काम, और बेवजह लागत वृद्धि जैसी बातें सामने आई थीं। योगी सरकार इसे सपा सरकार की समाजवादी लूट बताती रही है। मौजूदा सरकार का आरोप है कि अखिलेश यादव ने लोकनायक जय प्रकाश नारायण के नाम का इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार को वैधता देने की कोशिश की।
जनता को सौंपा जाएगा जय जेपी के नाम का सपना
एलडीए के तहत जेपीएनआईसी को एक उपयोगी, आधुनिक और पारदर्शी केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे प्रदेश की जनता को वह सुविधा मिलेगी जिसकी वह वर्षों से हकदार थी। सरकार का दावा है कि सपा की राजनीति ने जहां जेपीएनआईसी को ‘घोटाले का स्मारक’ बना दिया था, वहीं योगी सरकार ने उसे ‘जनसेवा का केंद्र’ बनाने की ठोस पहल की है। अब यह परियोजना सिर्फ लखनऊ नहीं, पूरे प्रदेश के युवाओं, आयोजकों और खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगी।