योगी जी! नागरिकों को इस समस्या से निजात दिलाइए, वाहन ट्रांसफर कराना बेहद कष्टकारी
उत्तर प्रदेश में वाहनों का स्वामित्व हस्तांतरण आरटीओ दफ्तर में अनिवार्य उपस्थिति पर आधारित है, जिससे नागरिकों, खासकर वरिष्ठजनों को भारी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यूपी जैसे प्रदेश में अन्य राज्यों की तरह डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू क्यों नहीं हो पा रही?
आगरा। उत्तर प्रदेश में प्रयुक्त वाहनों के स्वामित्व हस्तांतरण की मौजूदा प्रक्रिया नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी की वजह बनी हुई है। कई राज्यों में इसका सरलीकरण हो चुका है, लेकिन तमाम मामलों में नजीर पेश करने वाला यूपी इस मामले में अभी पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। वर्तमान व्यवस्था के तहत वाहन बेचने और खरीदने वाले दोनों पक्षों को, वाहन सहित अनिवार्य रूप से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में उपस्थित ही नहीं होना पड़ता बल्कि घंटों इंतजार भी करना पड़ता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह किसी सजा से कम नहीं होता।
यद्यपि इस प्रक्रिया का घोषित उद्देश्य पारदर्शिता है, परंतु व्यवहार में यह अत्यधिक जटिल, समय-खर्चीली और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली साबित हो रही है। कई मामलों में नागरिकों को जानबूझकर कार्य में देरी और अतिरिक्त, गैर-आधिकारिक भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है।
देश के अन्य अधिकांश राज्यों में आधार-लिंक्ड ओटीपी सत्यापन और डिजिटल डॉक्यूमेंट सबमिशन से स्वामित्व हस्तांरण की प्रक्रिया आसान और सुरक्षित हो चुकी है। इस व्यवस्था से नागरिकों को यात्रा और समय दोनों की बचत होती है, साथ ही भ्रष्टाचार की संभावना भी घटती है।
उत्तर प्रदेश की वर्तमान प्रक्रिया के कारण वरिष्ठ नागरिकों, यहां तक कि 80 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को भी घंटों आरटीओ में बैठना पड़ता है। बीमार या अस्पताल में भर्ती व्यक्ति भी उपस्थिति की अनिवार्यता की वजह से से हो जाते हैं। कामकाजी पेशेवरों को कार्यस्थल का बहुमूल्य समय गंवाना पड़ता है। वाहन और पक्षकार दोनों लंबे समय तक औपचारिकताओं में बंधे रहते हैं।
लोक स्वर के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इन्हीं जटिलताओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए यूपी के मुख्य सचिव को एक पत्र भी लिखा है। पत्र में श्री गुप्ता ने कहा है कि यह मैनुअल व्यवस्था जनता की सुविधा के बजाय बिचौलियों के हित में चल रही है। अगर उत्तर प्रदेश भी आधार आधारित डिजिटल सिस्टम लागू कर दे तो प्रक्रिया सुरक्षित, पारदर्शी और सुविधाजनक हो जाएगी। इससे नागरिकों को परेशानी से छुटकारा मिलेगा, खासकर वरिष्ठ नागरिकों को।