उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में मदरसों पर कार्रवाई नाइंसाफी- मौलाना रजवी
बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उत्तराखंड और मध्यप्रदेश में मदरसों के खिलाफ की जा रही प्रशासनिक कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है।
बरेली में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि “यह सरासर नाइंसाफी और संविधान की आत्मा के खिलाफ है। जिन मदरसों ने देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई, आज उन्हीं को निशाना बनाया जा रहा है।”
उन्होंने उत्तराखंड के हल्द्वानी में 13 मदरसों को सील किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर दस्तावेजों की कमी है या शिक्षा व्यवस्था में कोई खामी है, तो उसे सुधारा जा सकता है, मगर सीधे तौर पर मदरसों को बंद करना इंसाफ का गला घोंटना है।
रविवार को हल्द्वानी के बनफूलपुरा थाना क्षेत्र में प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ मदरसों को यह कहकर सील किया कि वे अवैध हैं। इस पर मौलाना ने जवाब दिया कि ये मदरसे पहले से ही सोसाइटी एक्ट 1860 के तहत पंजीकृत हैं। यदि प्रशासन मान्यता देने में लापरवाही करता है या भ्रष्टाचार के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो दोष प्रशासन का है, न कि मदरसों का।
मध्य प्रदेश में बुल्डोजर कार्रवाई पर भी मौलाना ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह अल्पसंख्यक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। संविधान ने सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाएं स्थापित करने की स्वतंत्रता दी है।
मौलाना ने चेताया कि "अगर राज्य सरकारें इसी तरह अल्पसंख्यक संस्थाओं के खिलाफ कार्य करती रहीं, तो प्रधानमंत्री मोदी का 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' नारा खोखला प्रतीत होगा।"