यमुना एक्सप्रेसवे के भयावह हादसे में प्रशासन ने की 10 के मरने की पुष्टि, हादसे वाली जगह पर नाले व नहर की वजह से था घना कोहरा, हथकौली समेत आसपास के गांव वाले सबसे पहले मौके पर पहुंचे

मथुरा /आगरा। यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के तीन बजे घने कोहरे के कारण थाना बलदेव क्षेत्र के माइलस्टोन 127 के पास 7 बसों और 3 कारों आपस में टकराने और फिर इन वाहनों में आग लगने से हुए भयावह हादसे में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले जहां प्रत्यक्षदर्शी मृतक संख्या 13 बता रहे थे, वहीं अब प्रशासन ने अधिकारिक तौर पर 10 लोगों की मौत की पुष्टि की है। हालांकि मृतकों की संख्या बढ़ने का खतरा बना हुआ है, क्योंकि कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे वाली जगह पर बहुत घना कोहरा इसलिए था क्योंकि बलदेव क्षेत्र में नाले का पानी रजवाह को क्रॉस कर यमुना में जाता है। इसी वजह से यहां पहले एक बस की गति धीमी हुई और फिर इसी बस से एक के बाद एक वाहन टकराते चले गये। सबसे पहले आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे और फंसे यात्रियों की मदद की। पुलिस-फायर ब्रिगेड जब तक पहुंची, तब तक सब कुछ राख हो चुका था।

Dec 16, 2025 - 11:25
Dec 16, 2025 - 11:26
 0
यमुना एक्सप्रेसवे के भयावह हादसे में प्रशासन ने की 10 के मरने की पुष्टि, हादसे वाली जगह पर नाले व नहर की वजह से था घना कोहरा, हथकौली समेत आसपास के गांव वाले सबसे पहले मौके पर पहुंचे
यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा के बलदेव क्षेत्र में मंगलवार को तड़के हुए भीषण हादसे की कुछ तस्वीरें, जो हादसे की भयावहता को बयां कर रही हैं।

दुर्घटनास्थल पर मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह, डीआईजी, डीएम मथुरा सीपी सिंह और एसएसपी मौजूद हैं। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि दस लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अभी जले हुए वाहनों में जांच चल रही है, इसलिए मृतक संख्या बढ़ने से भी इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हादसे में घायल हुए 70 लोगों को मथुरा के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जबकि दो घायलों को आगरा के एसएन मेडिकल कॊलेज रैफर किया गया है।

उन्होंने बताया कि वाहनों से बरामद सामान और कागजात आदि के आधार पर मृतकों की पहचान कराई जा रही है। फिलहाल 4 मृतकों की पहचान हो चुकी है।

घने कोहरे ने रात साढ़े तीन बजे आगरा से दिल्ली जा रही सात स्लीपर बसों और दो कारों को आपस में भिड़ा दिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई वाहनों में आग लग गई, जिसमें चार लोग मौके पर जिंदा जल गए। वरिष्ठ पत्रकार चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने बताया कि हादसे की जगह हथकौली गांव के पीछे है, जहां बलदेव ब्लॉक के हथकौली नाले और बलदेव रजवाह का पानी साइफन के जरिए यमुना में जाता है। इसी कारण दो फर्लांग के दायरे में भारी धुंध छाई हुई थी, जबकि एक्सप्रेसवे के अन्य हिस्सों पर उतना कोहरा नहीं था।

कोहरे में पहली बस रेंगी, पीछे से लगातार टक्करें

संभावना है कि कोहरे वाले स्पॉट पर पहली बस रेंगने लगी तो पीछे की बसें तेज रफ्तार से टकराती चली गईं। भीषण आवाज हथकौली, छिवरऊ, नगला महारत, आंगई और आसपास के गांवों तक गूंजी। ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और वाहनों में फंसे लोगों को निकालने में जुट गए। एक युवक ने बताया कि उसने बसों से 8-9 ऐसे लोग निकलते देखे जो बुरी तरह जले हुए थे। कुछ बसों में मानव अंग फंसे मिले, जिंदा जले यात्रियों के अवशेष और कंकाल बाहर निकाले जा रहे हैं। शवों की शिनाख्त का प्रयास जारी है।

रेस्क्यू में देरी, 70  घायल

पुलिस और फायर ब्रिगेड तब पहुंची जब ज्यादातर वाहन जल चुके थे। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि शुरुआत में 4 शव बरामद हुए, दोपहर 10 बजे तक मृतक संख्या 10 पहुंच गई। पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF टीमें रेस्क्यू में जुटी हैं। हाईवे से मलबा हटाया जा रहा है, यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। आधिकारिक तौर पर 70  घायल हुए हैं। घायलों को जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में भेजा गया। घायलों का इलाज जारी है।

यह यमुना एक्सप्रेसवे पर अब तक का सबसे भयानक हादसा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नाले-रजवाह के पानी वाले इलाकों में रात को कोहरा जरूर छाता है। एक्सप्रेसवे अथॉरिटी को वहां संकेतक लगाने चाहिए। हादसे से सावधानी बरतने का सबक मिला है।

SP_Singh AURGURU Editor