‘गणपति बप्पा मोरया-अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से गूंजा आगरा, गणेश प्रतिमाओं का नम आंखों से विसर्जन

अनंत चतुर्दशी पर आगरा में गणेश महोत्सव का भक्तिमय समापन हुआ। गोकुलपुरा के प्राचीन श्री सिद्धिविनायक मंदिर से ढोल-नगाड़ों के बीच गणपति विसर्जन यात्रा कैलाश घाट पहुंची, जहां 1008 दीपकों से महाआरती के बाद विधि-विधान से प्रतिमा का यमुना में विसर्जन किया गया। इस दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों से माहौल गूंज उठा। वहीं छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में 12 दिवसीय महोत्सव का समापन हुआ, जहां 101 किलो का मेवा मोदक और बच्चों द्वारा किया गया अथर्वशीर्ष पाठ आकर्षण का केंद्र रहा।

Sep 25, 2026 - 21:50
 0
‘गणपति बप्पा मोरया-अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से गूंजा आगरा, गणेश प्रतिमाओं का नम आंखों से विसर्जन

अनंत चतुर्दशी पर धूमधाम से संपन्न हुआ गणेश महोत्सव, ढोल-नगाड़ों के बीच निकली विसर्जन यात्राएं, कैलाश घाट पर विधि-विधान से यमुना में विसर्जित हुईं प्रतिमाएं

आगरा। अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर शुक्रवार को ताजनगरी में गणेश महोत्सव का श्रद्धा, उल्लास और भावुक माहौल के बीच समापन हुआ। शहर के विभिन्न गणेश मंदिरों और पंडालों में कई दिनों से चल रहे धार्मिक आयोजनों के बाद भक्तों ने भगवान गणपति की प्रतिमाओं को ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के साथ विदाई दी। ढोल-नगाड़ों की थाप, भक्ति गीतों और जयकारों के बीच निकली विसर्जन यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कैलाश घाट पर विधि-विधान से पूजन के बाद गणपति प्रतिमाओं का यमुना में विसर्जन किया गया।

गोकुलपुरा स्थित प्राचीन श्री सिद्धिविनायक मंदिर में 66वें गणेश महोत्सव का समापन विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। अनंत चतुर्दशी पर सुबह मंदिर में भगवान गणेश का लड्डू और दुर्वा से सहस्रार्चन किया गया। इसके बाद विधि-विधान से हवन संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

शाम को गणपति प्रतिमा की विसर्जन यात्रा से पहले 1008 दीपकों से भव्य महाआरती की गई। दीपों की रोशनी से मंदिर परिसर जगमगा उठा और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आरती कर भगवान गणपति से सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद ढोल-नगाड़ों की थाप और गणपति के जयकारों के बीच विसर्जन यात्रा कैलाश घाट के लिए रवाना हुई।

विसर्जन यात्रा में श्रद्धालु अबीर-गुलाल उड़ाते और गणपति बप्पा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। कैलाश घाट पहुंचने के बाद महंत पंडित मनीष शर्मा के सानिध्य में विधिवत पूजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भक्तों ने भगवान गणेश की प्रतिमा को यमुना में विसर्जित किया। प्रतिमा विसर्जन के समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भक्तों ने अगले वर्ष फिर से गणपति के आगमन की कामना करते हुए ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारे लगाए।

इस अवसर पर पुनीत वर्मा, वैभव शर्मा, यश पंडित, अतुल गौतम, कुणाल गौतम, आशु अग्रवाल, विजय यादव, शत्रुजीत, समर, समीर सहित सैकड़ों गणपति भक्त मौजूद रहे।

12 दिवसीय महागणपति महोत्सव का भी हुआ समापन

इसी क्रम में छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव का भी अनंत चतुर्दशी पर श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हुआ। समापन दिवस पर दिल्ली पब्लिक स्कूल कुंडोल के नन्हे-मुन्ने बच्चे मंदिर पहुंचे और भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति के दर्शन किए। बच्चों ने सामूहिक प्रार्थना के साथ श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया।
बच्चों के लिए भगवान महागणपति का भव्य श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर वस्त्र सेवा धर्मेंद्र अग्रवाल की ओर से की गई। मंदिर परिसर में बच्चों ने पूजा-अर्चना कर भगवान गणपति से आशीर्वाद लिया।

मंदिर में तैयार किया गया 101 किलो का मेवा मोदक भी श्रद्धालुओं और बच्चों के आकर्षण का केंद्र रहा। शुद्ध मेवा से तैयार किए गए विशाल मोदक को स्वच्छता के लिए जालीदार वस्त्र से ढककर रखा गया था और आकर्षक ढंग से सजाया गया था। इसे देखकर बच्चे विशेष रूप से उत्साहित नजर आए। मंदिर प्रबंधन की ओर से बच्चों को प्रसादी वितरित की गई। महोत्सव के समापन पर मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया। शाम को विशेष महाआरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान महागणपति की आरती की। इसके बाद महाप्रसाद का वितरण किया गया।

महोत्सव के 12 दिनों के दौरान भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति का प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। अलग-अलग रंगों के वस्त्र, स्वर्णाभूषण, तिलक और पुष्प बंगले से भगवान के मनोहारी स्वरूप सजाए गए। दक्षिण भारतीय पूजा पद्धति के अनुरूप अभिषेक, हवन, सहस्रनाम अर्चना और आरती सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी हुए। मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग ने कहा कि 12 दिवसीय गणेश महोत्सव का समापन बच्चों की सहभागिता के साथ होना विशेष आनंद का विषय है। बच्चों द्वारा सामूहिक प्रार्थना और अथर्वशीर्ष का पाठ धार्मिक संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सुंदर माध्यम है।

मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित ने कहा कि अनंत चतुर्दशी भगवान गणपति की आराधना और विदाई का पावन अवसर है। वहीं मंदिर के प्रबंधक नितिन शर्मा ने बताया कि महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए नियमित रूप से पूजा, दर्शन और प्रसादी की व्यवस्था की गई। समापन दिवस पर महाआरती और महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था रही।