रेप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी असंवेदनशील- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। नाबालिग लड़की के निजी अंग को पकड़ने और पायजामे के नाड़े को तोड़ने को बलात्कार या बलात्कार की कोशिश न बताने वाले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने फैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणियां पूरी तरह असंवेदनशील और अमानवीय नजरिया दर्शाती हैं।

Mar 26, 2025 - 12:47
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रेप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी असंवेदनशील- सुप्रीम कोर्ट

-सर्वोच्च न्यायालय ने कहा- फैसला देने वाले जज ने बहुत असंवेदनशीलता दिखाई

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राम मनोहर नारायण मिश्र ने कासगंज जिले के एक मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की थी कि लड़की के प्राइवेट पार्ट पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश से यह मामला रेप या अटेम्पट टू रेप का नहीं बनता।

इसके साथ ही जस्टिस मिश्र ने दो आरोपियों पर पुलिस द्वारा लगाई गई धाराएं बदल दी थीं। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि आरोपियों से बलात्कार की कोशिश का जार्ज हटाकर यौन उत्पीड़न की धाराओं में मुकदमा चलाया जाए।

जस्टिस मिश्र की इस टिप्पणी का देश भर में विरोध हो रहा था। विधिवेत्ताओं के साथ ही राजनेता, महिला संगठन और अन्य लोग इसका विरोध कर रहे थे। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की खुद ही सुनवाई करने का फैसला किया था।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि एक गंभीर मामले में हाईकोर्ट के जज ने फैसला देते समय बहुत असंवेदनशीलता दिखाई है। फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह कमी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

SP_Singh AURGURU Editor