अमेरिका ने ईरान पर हमला पांच दिनों के लिए टाला, मध्यस्थता में जुटा है पाक, दो अन्य मुस्लिम देश भी कर रहे प्रयास
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनका देश ईरान के साथ बातचीत कर रहा है। इस कारण ट्रंप ने ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्टर पर हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का आदेश दिया है। इस बीच दावा किया जा रहा है कि तीन मुस्लिम देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करा रहे हैं।
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच सुलह की कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों को 5 दिन के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों से चली बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया है। ईरान ने ट्रंप के इस बयान पर कुछ नहीं कहा है हालांकि तेहरान पहले कह रहा था कि वो संघर्ष विराम के लिए तैयार नहीं है। इस बीच खुलासा हुआ है कि तीन मुस्लिम देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, जिनमें भारत का सबसे बड़ा दुश्मन पाकिस्तान भी शामिल है।
अमेरिकी समाचार आउटलेट 'एक्सियोस' ने बताया कि तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात की, और अलग से, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी मिले। रिपोर्टर, बराक रविद ने एक अज्ञात अमेरिकी सूत्र के हवाले से कहा कि चर्चा युद्ध को समाप्त करने और सभी लंबित मुद्दों को हल करने के बारे में थी। अराघची के मंत्रालय ने कहा कि तनाव कम करने के लिए "पहल" की जा रही हैं। ईरान की मेहर समाचार एजेंसी ने बताया कि तेहरान चाहता है कि वॉशिंगटन—जो इस युद्ध को शुरू करने वाला पक्ष है—इसमें सीधे तौर पर शामिल हो। व्हाइट हाउस ने बातचीत के विषय, उसमें शामिल लोगों या बातचीत कहां हुई, इस बारे में पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।
ट्रंप लगातार ईरान के नेतृत्व, मिसाइल क्षमता और परमाणु ढांचे को खत्म करने की बात कह रहे हैं, लेकिन संघर्ष लंबा खिंचता देख वह भी बैकफुट पर हैं। इस बीच खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों पर हमले हुए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य के अधिकतर हिस्से में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने लगा है। अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों का दबाव भी है। वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रख ट्रंप अब इस टकराव से निकलने का रास्ता तलाशते दिख रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा कि वह “मध्य पूर्व में हमारे बड़े सैन्य प्रयासों को धीरे-धीरे खत्म करने” की तैयारी कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार उन्होंने ईरान में सत्ता परिवर्तन (रेजीम चेंज) की शर्त का उल्लेख नहीं किया, जो पहले उनके रुख का अहम हिस्सा था।
इजरायल ने अभी तक यह संकेत नहीं दिया है कि वह ट्रंप के किसी भी शांति प्रयास का समर्थन करेगा। इजरायल के सैन्य प्रमुख एयाल जमीर ने कहा कि युद्ध अभी मध्य चरण में है, लेकिन दिशा स्पष्ट है और वे अपने भविष्य और स्वतंत्रता के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। इस बीच एक गंभीर घटनाक्रम में ईरान की मिसाइलों ने इजरायल की प्रसिद्ध आयरन डोम सुरक्षा प्रणाली को भेदते हुए डिमोना जैसे संवेदनशील इलाकों को निशाना बनाया, जहां परमाणु संयंत्र मौजूद हैं।