अमेरिका की  इज्जत पर बट्टा,  एफ -35 फाइटर 'जमीन' पर आया,  20 दिन की जंग में गंवाए 16 सैन्य एयरक्रॉफ्ट

 अमेरिका-ईरान युद्ध और तेज होता जा रहा है। इस युद्ध में ईरान को हराया नहीं जा सका है। ईरान ने अमेरिका के मर्म पर चोट करते हुए उसके सबसे ताकतवर फाइटर जेट एफ-35 को नुकसान पहुंचाया है। इस युद्ध ने अमेरिका की हवाई श्रेष्ठता की पोल खोलकर रख दी है। एफ-35 की कीमत भी बहुत ज्यादा है, जिससे अमेरिकी सैन्य क्षमता को आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।

Mar 20, 2026 - 20:27
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अमेरिका की  इज्जत पर बट्टा,  एफ -35 फाइटर 'जमीन' पर आया,  20 दिन की जंग में गंवाए 16 सैन्य एयरक्रॉफ्ट

नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान के बीच जंग को 20 दिन से ज्यादा हो गए, मगर ये लड़ाई थमती नजर नहीं आ रही है। इस जंग में अमेरिका अब तक बड़ा नुकसान हुआ है। अमेरिका ने कम से कम 16 मिलिट्री एयरक्रॉफ्ट गंवा दिए, जिसमें 12 ड्रोंस और चार लड़ाकू विमान हैं। ब्लूमबर्ग ने यह जानकारी दी है। वहीं, सीएनएन ने रिपोर्ट दी है कि दुनिया के सबसे ताकतवर स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35ए को भी ईरान के हमले में नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद उसकी इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी है।

दरअसल, अमेरिका खुद को आसमान का सिकंदर मानता आया है, मगर उसकी हवाई श्रेष्ठता भी खतरे में पड़ चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बर्बाद करने की चेतावनी देने के बाद भी ईरान को हराने में नाकाम रहे हैं। अलबत्ता अमेरिका को कई मामलों में बड़ा नुकसान हो गया है। उसकी इज्जत पर बड़ा बट्टा लग चुका है। ईरान की आईआरजीसी  ने कहा है कि उसके पास मिसाइलों की कमी नहीं हैं। युद्ध के दौरान और भी मिसाइलें बन रही हैं। उसने कहा है कि वह अभी अमेरिका को और चौंकाएगा। कहा जा रहा है कि एफ-35 के बूते इतराने वाले अमेरिका के अहंकार पर यह चोट है।

सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यूएस सेंट्रल कमांड के एक प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस ने बताया कि पांचवीं पीढ़ी स्टील्थ फाइटर जेट F-35 ईरान के ऊपर एक कॉमबैट मिशन में था, जब इसे जबन इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। हॉकिंस ने बताया कि विमान को सुरक्षित लैंड कराया गया और इसकी जांच की जा रही है।

ईरान ने दावा किया कि उसने एक अमेरिकी F-35 लाइटनिंग 2 विमान पर हमला किया है और साथ ही यह भी कहा कि ऐसा करने वाला वह पहला देश है। ईरान का यह दावा व्हाइट हाउस द्वारा एक फेसबुक पोस्ट में एफ-35 को निर्णायक अमेरिकी शक्ति का प्रतीक बताने के ठीक एक दिन बाद आया है।

रिपोर्टों के अनुसार, जो 12 अमेरिकी ड्रोंस नष्ट हुए हैं, वो सभी अमेरिकी सेना ईरान और पश्चिम एशिया में दूसरे विरोधियों के खिलाफ लगातार इस्तेमाल करती रही है। जिन चार लड़ाकू विमानों को नुकसान उठाना पड़ा है, उनमें तीन F-15 फाइटर प्लेन हैं, जो गलती से कुवैत ने मार गिराए थे। इसके अलावा, एक K-135 टैंकर विमान भी इराक के ऊपर ईंधन भरने के दौरान नष्ट हो गया। इसके सभी 6 क्रू मेंबर्स भी मारे गए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सीएनएन को बताया-विमान सुरक्षित उतर गया और पायलट की हालत स्थिर है। इस घटना की जांच चल रही है। इसके अलावा, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने पिछले सप्ताह बताया था कि सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरपोर्ट पर ईरान के हमले में पांच ईंधन भरने वाले विमान क्षतिग्रस्त हो गए थे।

रिपोर्टों के अनुसार, कुल मिलाकर, इस युद्ध में कम से कम 14 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 200 घायल हुए हैं। द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध के शुरुआती दिनों में ही अमेरिका को करीब 11 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है।

ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरानी रक्षा प्रणाली ने कम से कम नौ रीपर ड्रोन मार गिराए हैं, जबकि एक अन्य ड्रोन जॉर्डन के एक हवाई अड्डे पर मिसाइल हमले में नष्ट हो गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अन्य दो रीपर ड्रोन दुर्घटनाओं में नष्ट हो गए।

तीन सप्ताह तक ईरान पर लगातार हमले करने और पिछले दौर के संघर्षों में उसे लगभग पूरी तरह से असुरक्षित छोड़ने के बावजूद अमेरिका और इजरायल के पास ईरान पर पूर्ण हवाई श्रेष्ठता नहीं है।
ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने पहले कहा था कि अमेरिका के पास केवल सीमित हवाई श्रेष्ठता है, जिसका अर्थ है कि अमेरिका केवल ईरानी हवाई क्षेत्र के विशिष्ट क्षेत्रों को नियंत्रित करता है और बाकी क्षेत्र अभी भी विवादित हैं।