आगरा मंडल में एनीमिया का ‘खामोश वार’, आगरा की 59.4% महिलाएं चपेट में
आगरा मंडल में एनीमिया महिलाओं के लिए गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। आगरा में 15-49 वर्ष की 59.4% महिलाएं, मथुरा में 63%, मैनपुरी में 57.8% और फिरोजाबाद में 57.1% महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक एनीमिया से निपटने के लिए आयरन की गोलियों के साथ संतुलित और पोषणयुक्त आहार जरूरी है। हरी सब्जियां, दालें, मोटे अनाज, तिल, गुड़, फल और विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ आहार में शामिल करने की सलाह दी गई है।
थकान, चक्कर और सांस फूलना को न करें नजरअंदाज, आगरा में 15-49 वर्ष की 59.4% महिलाएं एनीमिया से प्रभावित; मथुरा में आंकड़ा 63 फीसदी तक पहुंचा
आगरा, 21 सितंबर 2026। थकान, थोड़े से काम में सांस फूलना, चक्कर आना और चेहरे की रंगत फीकी पड़ना—इन लक्षणों को अक्सर सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन यही संकेत शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया की ओर इशारा कर सकते हैं। चिंता की बात यह है कि एनीमिया महिलाओं के बीच एक बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। आगरा मंडल के चार जिलों के आंकड़े बताते हैं कि 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में एनीमिया का स्तर 57 फीसदी से 63 फीसदी के बीच है।
उपलब्ध राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों के अनुसार आगरा जिले में 15-49 वर्ष की 59.4 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। मथुरा में यह आंकड़ा 63 प्रतिशत, मैनपुरी में 57.8 प्रतिशत और फिरोजाबाद में 57.1 प्रतिशत है। गर्भवती महिलाओं में भी एनीमिया की स्थिति गंभीर बनी हुई है। आगरा में 61.8 प्रतिशत, मथुरा में 55.2 प्रतिशत, मैनपुरी में 48.4 प्रतिशत और फिरोजाबाद में 45.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित बताई गई हैं।
केवल आयरन की कमी नहीं, पूरा पोषण जरूरी
जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लॉयल) की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. आशु के अनुसार एनीमिया को केवल आयरन की कमी से जोड़कर देखना सही नहीं है। आयरन के साथ फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 और विटामिन-ए जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी एनीमिया की वजह बन सकती है। गर्भावस्था और धात्री अवधि में महिला के शरीर को आयरन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरत और बढ़ जाती है। इस दौरान एनीमिया होने पर मां और शिशु दोनों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। प्रसव के दौरान या उसके बाद अत्यधिक रक्तस्राव, समय से पहले प्रसव, कम वजन के बच्चे के जन्म और गर्भ में शिशु के विकास पर प्रतिकूल असर जैसी स्थितियां सामने आ सकती हैं। धात्री मां में एनीमिया होने पर प्रसव के बाद रिकवरी भी प्रभावित हो सकती है, जिसका असर बच्चे की देखभाल और पोषण पर पड़ सकता है।
‘एनीमिया मुक्त भारत’ अभियान के तहत उपचार पर जोर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से आयरन और फॉलिक एसिड की गोलियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। गंभीर एनीमिया की स्थिति में, जब हीमोग्लोबिन काफी कम हो और गोलियों या सिरप से अपेक्षित सुधार न हो, तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नस के माध्यम से आयरन सुक्रोज या एफसीएम दिया जाता है। उन्होंने बताया कि पोषण संबंधी जागरूकता की कमी, कम उम्र में विवाह, बार-बार गर्भधारण और आयरन की गोलियों का नियमित सेवन न करना एनीमिया नियंत्रण की प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। इन कारणों से उपचार के बावजूद कई महिलाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाता।
दवा के साथ थाली में भी बदलाव जरूरी
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार मौर्य के अनुसार स्वास्थ्य विभाग और एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत अब दवाओं के साथ पोषण आधारित हस्तक्षेप पर भी जोर दिया जा रहा है। स्कूलों में मिड-डे मील और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल, सहजन की पत्तियों और स्थानीय पौष्टिक अनाज को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मथुरा जिला अस्पताल के डायटिशियन डॉ. मयंक सारस्वत का कहना है कि एनीमिया से बचाव और प्रबंधन में संतुलित एवं विविधतापूर्ण आहार की महत्वपूर्ण भूमिका है। आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों में पालक, मेथी, सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां, चना, राजमा, मसूर की दाल और बाजरा-ज्वार जैसे मोटे अनाज शामिल किए जा सकते हैं। गुड़, तिल और खजूर भी आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। मांसाहारी भोजन लेने वाले लोग अंडा, मछली और मीट से भी आयरन प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि भोजन में आयरन शामिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर में उसके बेहतर अवशोषण पर भी ध्यान देना जरूरी है।
नींबू और आंवला बढ़ाते हैं आयरन का अवशोषण
डॉ. सारस्वत के अनुसार विटामिन-सी शरीर में पौधों से मिलने वाले आयरन के अवशोषण में मदद करता है। इसलिए भोजन में नींबू, आंवला, संतरा, टमाटर और अमरूद जैसे विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है। वहीं विटामिन बी-12 और फोलिक एसिड लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके लिए दूध, दही, पनीर, अंकुरित अनाज और दालों को संतुलित आहार में शामिल करना उपयोगी है।
खाने के बाद तुरंत चाय-कॉफी से बचें
आगरा जिला अस्पताल की डायटीशियन ललितेश शर्मा बताती हैं कि कई बार पौष्टिक भोजन लेने के बावजूद गलत खान-पान की आदतें आयरन के अवशोषण में बाधा बनती हैं। भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से बचना चाहिए। इनके कुछ घटक आयरन के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं। इसी तरह आयरन युक्त भोजन और कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन एक साथ करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। उनका कहना है कि एनीमिया के उपचार में जरूरत के अनुसार दवाएं और चिकित्सकीय उपचार जरूरी हैं, लेकिन लंबे समय तक बेहतर पोषण बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आयशा की कहानी: 7.9 से बढ़कर 10 ग्राम हुआ हीमोग्लोबिन
नीम वाली दरगाह, बोदला निवासी 23 वर्षीय आयशा अपनी पहली गर्भावस्था के दौरान एनीमिया की चपेट में आ गई थीं। गर्भावस्था के पांचवें महीने में उन्हें कमजोरी, थोड़े काम में सांस फूलने और थकान की शिकायत होने लगी। आशा कार्यकर्ता मेहजबीं ने उन्हें शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच के लिए पहुंचाया। जांच में उनका हीमोग्लोबिन 7.9 ग्राम पाया गया। डॉ. दीक्षा गौतम ने उन्हें पौष्टिक आहार, मौसमी फलों के सेवन और नियमित रूप से आयरन की गोलियां लेने की सलाह दी। उन्हें आयरन और कैल्शियम की गोलियां उपलब्ध कराई गईं और नियमित जांच कराने के लिए कहा गया। चिकित्सकीय जरूरत पड़ने पर आयरन सुक्रोज देने की बात भी बताई गई।
आयशा के पति बाहर रहते हैं, इसलिए उनकी मां उनकी देखभाल कर रही हैं। स्वास्थ्यकर्मियों ने उनकी मां को गर्भावस्था में विशेष देखभाल और प्रसव के समय पर्याप्त हीमोग्लोबिन के महत्व के बारे में भी समझाया। स्टाफ नर्स ने उन्हें पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद और आराम की सलाह दी। अब आयशा की गर्भावस्था आठवें महीने में है और उनका हीमोग्लोबिन बढ़कर 10 ग्राम हो गया है। उन्हें संस्थागत प्रसव कराने की सलाह दी गई है।
मनोरमा ने अपनाई सलाह, प्रसव के समय हीमोग्लोबिन 12 ग्राम
बोदला निवासी 25 वर्षीय मनोरमा भी गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से जूझीं। उन्होंने बताया कि पांचवें महीने में काम करते समय उन्हें तेज थकान, चक्कर और सांस फूलने की शिकायत होने लगी थी। जांच में उनका हीमोग्लोबिन करीब 8 ग्राम पाया गया। आशा कार्यकर्ता सुनीता और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दहतोरा मोड़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीक्षा गौतम ने उन्हें नियमित रूप से आयरन और कैल्शियम की गोलियां लेने, पौष्टिक आहार खाने और पर्याप्त आराम करने की सलाह दी। मनोरमा के अनुसार उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह का नियमित रूप से पालन किया। इसके बाद प्रसव के समय उनका हीमोग्लोबिन बढ़कर 12 ग्राम हो गया। 26 अगस्त 2026 को एसएन मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन से उन्होंने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। मनोरमा के मुताबिक अब वह और उनका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। उनका कहना है कि समय पर जांच, उपचार और परिवार के सहयोग से गर्भावस्था सुरक्षित तरीके से पूरी हो सकी।
एनीमिया से बचाव के लिए विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड का सेवन, संतुलित एवं विविधतापूर्ण आहार और गर्भावस्था के दौरान नियमित प्रसवपूर्व जांच पर जोर देते हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं में कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना या अत्यधिक थकान जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच कराना जरूरी है।