पाकिस्तान का राष्ट्रपति बनना चाहते हैं असीम मुनीर
इस्लामाबाद। पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी और अब व्हिसलब्लोअर मेजर (सेवानिवृत्त) आदिल राजा ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि असीम मुनीर पाकिस्तान के पहले से ही कमजोर लोकतंत्र को और कमजोर कर रहे हैं। राजा ने आरोप लगाया कि मुनीर ने पहले खुद को फील्ड मार्शल की रैंकिंग से नवाजा और अब अराजकता फैलाकर सत्ता पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करना चाहते हैं। पहले भी ऐसी खबरें आती रही हैं कि असीम मुनीर का पाकिस्तान के वर्तमान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ रिश्ते सामान्य नहीं हैं।
उन्होंने पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति और सेना प्रमुख का हवाला देते हुए दावा किया, "कथित तौर पर यह योजना सेना प्रमुख आसिम मुनीर की है। वह अपने रिश्तेदार को प्रधानमंत्री, खुद को या किसी अन्य जनरल को राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं।" राजा ने मुनीर पर पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। राजा के खिलाफ आईएसआई के पंजाब सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर राशिद नासिर ने ब्रिटेन में मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
राजा ने 21 जुलाई को शुरू हुए लंदन मुकदमे से कुछ दिन पहले कहा, "यह पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई, जिसके साथ मैं कभी काम करता था, द्वारा मेरे खिलाफ शुरू की गई क़ानूनी लड़ाई का हिस्सा है।" ब्रिटेन में निर्वासन में रह रहे राजा ने बताया कि ब्रिटेन की आतंकवाद-रोधी पुलिस ने आतंकवाद के आरोपों में नौ महीने तक उनकी जांच की, लेकिन उन्हें पूरी तरह से निर्दोष करार दिया। उन्होंने दावा किया कि मानहानि का मुकदमा उन्हें चुप कराने के लिए पाकिस्तानी सेना की एक दूसरी योजना है।
राजा ने मुनीर और आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक पर असहमति को दबाने और राजनीतिक हेरफेर, न्यायिक हस्तक्षेप और नागरिक स्वतंत्रता के व्यापक उल्लंघन सहित सैन्य अपराधों को छिपाने के लिए ब्रिटेन के उदार मानहानि कानूनों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं, उनकी मां को नजरबंद कर दिया गया है और उनकी वापसी रोकने के लिए उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, "आईएसआई इसे दबाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है। वे बस कोई कवरेज नहीं चाहते, क्योंकि इससे उनकी कमज़ोरियां उजागर होती हैं।" राजा को उनकी अनुपस्थिति में कोर्ट मार्शल किया गया और पाकिस्तान के आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत 14 साल की सज़ा सुनाई गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका एकमात्र अपराध पाकिस्तान की राजनीति पर सेना की पकड़ को उजागर करना था। उन्होंने कहा, "मैं सबसे बड़ा पाप कर रहा था: अपनी संस्था के अपराधों को उजागर कर रहा था।