फर्जी प्रमाण-पत्र से टेंडर हथियाने की कोशिश, एडीए ने एएमएस इंटरप्राइजेज को 3 साल के लिए किया डिबार

आगरा विकास प्राधिकरण ने एएमएस इंटरप्राइजेज की प्रोपराइटर सरिता मिश्रा को तीन साल के लिए टेंडर प्रक्रिया से डिबार किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सिविल श्रेणी-सी के ठेके के नवीनीकरण के दौरान कथित तौर पर जिलाधिकारी द्वारा जारी हैसियत प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसकी वैधता 15 मई 2027 तक दर्शाई गई थी। ऑनलाइन सत्यापन में प्रमाण-पत्र में कथित छेड़छाड़ सामने आने के बाद एडीए ने प्राधिकरण के नियमों के तहत कार्रवाई की।

Sep 5, 2026 - 18:26
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फर्जी प्रमाण-पत्र से टेंडर हथियाने की कोशिश, एडीए ने एएमएस इंटरप्राइजेज को 3 साल के लिए किया डिबार

आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने टेंडर प्रक्रिया में कथित फर्जी दस्तावेज लगाए जाने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एएमएस इंटरप्राइजेज की प्रोपराइटर सरिता मिश्रा को तीन वर्ष के लिए निविदा प्रक्रिया से डिबार कर दिया गया है। यह कार्रवाई वित्तीय वर्ष 2026-27 में सिविल श्रेणी-सी के ठेके के नवीनीकरण से संबंधित प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी हैसियत प्रमाण-पत्र लगाए जाने के मामले में की गई है।

प्राधिकरण के स्तर से दस्तावेज की जांच के दौरान प्रमाण-पत्र को लेकर संदेह सामने आया। इसके बाद ऑनलाइन माध्यम से प्रमाण-पत्र का सत्यापन कराया गया। जांच में दस्तावेज में छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आने के बाद एडीए ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की।

15 मई 2027 तक वैधता दर्शाई गई थी

जानकारी के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में प्रस्तुत किए गए हैसियत प्रमाण-पत्र में उसकी वैधता 15 मई 2027 तक दर्शाई गई थी। प्रमाण-पत्र को जिलाधिकारी द्वारा जारी किया हुआ बताया गया था। नवीनीकरण की प्रक्रिया के दौरान जब एडीए अधिकारियों ने दस्तावेज का ऑनलाइन सत्यापन किया तो प्रमाण-पत्र की वास्तविक स्थिति और प्रस्तुत दस्तावेज में अंतर सामने आया। जांच में प्रमाण-पत्र के साथ छेड़छाड़ किए जाने का आरोप सामने आने के बाद प्राधिकरण ने संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।

निविदा प्रक्रिया में तीन साल तक नहीं ले सकेंगी हिस्सा

एडीए ने अपने नियमों के तहत एएमएस इंटरप्राइजेज की प्रोपराइटर सरिता मिश्रा को तीन वर्ष की अवधि के लिए निविदा प्रक्रिया से डिबार कर दिया है। इसका सीधा असर आने वाले तीन वर्षों में प्राधिकरण की ओर से जारी होने वाली संबंधित निविदाओं में फर्म की भागीदारी पर पड़ेगा। प्राधिकरण की इस कार्रवाई को टेंडर प्रक्रिया में दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर अपनाई जा रही सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। एडीए की ओर से स्पष्ट किया गया है कि निविदा प्रक्रिया में लगाए जाने वाले प्रमाण-पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच के दौरान यदि किसी तरह की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

ऑनलाइन सत्यापन से खुली दस्तावेज की पोल

इस मामले में खास बात यह रही कि प्रस्तुत प्रमाण-पत्र का ऑनलाइन सत्यापन कराया गया। इसी प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज में कथित छेड़छाड़ का पता चला। इसके बाद एडीए ने प्रमाण-पत्र की वैधता और उसकी वास्तविकता को लेकर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की। टेंडर प्रक्रिया में किसी भी फर्म की पात्रता तय करने में प्रमाण-पत्र अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में दस्तावेज में कथित हेरफेर सामने आने के बाद एडीए ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए तीन साल के डिबारमेंट का फैसला लिया।

टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर

एडीए की कार्रवाई से यह संकेत भी गया है कि विकास कार्यों के लिए होने वाली निविदा प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच को लेकर प्राधिकरण सतर्क है। फर्जी या छेड़छाड़ किए गए दस्तावेजों के जरिए ठेका प्रक्रिया में शामिल होने की कोशिश करने वाले ठेकेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।