सीजेआई की शपथ से पहले जस्टिस सूर्यकांत ने  बताई प्राथमिकताएं

भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने अपनी प्राथमिकताओं को साझा किया। वे सुप्रीम कोर्ट और निचली अदालतों में योजनाओं को लागू करेंगे। मुकदमों का बोझ कम करना उनकी मुख्य चिंता है। जस्टिस सूर्यकांत ने एआई के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। वे 24 नवंबर को शपथ लेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट की नई बेंच खोलने पर भी उन्होंने बात की।

Nov 23, 2025 - 19:18
 0
सीजेआई की शपथ से पहले जस्टिस सूर्यकांत ने  बताई प्राथमिकताएं

 


नई दिल्ली। भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शपथ लेने से पहले मीडिया से बात की और खुलकर अपने दिल की बात रखी। इस दौरान उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले वे सुप्रीम कोर्ट और देश भर की निचली अदालतों में एक साथ कई योजनाएं लागू करेंगे।

जस्टिस सूर्यकांत बताया कि वे शपथ लेने के तुरंत बाद मैं हाईकोर्ट से संपर्क करूंगा और उन मामलों की पहचान करूंगा जिनकी वजह से निचली अदालतों में सुनवाई अटकी हुई है। साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार अक्सर सबसे बड़ी पक्षकार होती है, और इस पर भी काम किया जाएगा कि इसे कैसे कम किया जाए। जस्टिस सूर्यकांत ने साफ किया कि अदालतों में मुकदमों का बोझ कम करना उनकी सबसे बड़ी चिंता है। इसके लिए वे एक खास योजना पर काम करेंगे।  
 
जस्टिस सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एआई के फायदे तो हैं, लेकिन लोगों के मन में इसके इस्तेमाल को लेकर कई डर और सवाल भी हैं। एआई को अदालती कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है, पर हर कोई चाहता है कि उसके केस का फैसला एक इंसान यानी जज ही करे। सोशल मीडिया पर जजों के फैसलों को लेकर होने वाली ट्रोलिंग पर उन्होंने कहा कि हर समस्या का हल होता है और जजों को आलोचनाओं से डरना नहीं चाहिए।

जस्टिस सूर्यकांत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक और बेंच खोलने के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण सवाल है, लेकिन किसी भी हाईकोर्ट की नई बेंच खोलने में कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि लखनऊ बेंच में अच्छी सुविधाएं हैं, जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट में आधुनिक सुविधाओं की कमी है और जजों की संख्या भी पूरी नहीं है। पार्किंग की समस्या भी है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में लोगों को जल्दी न्याय मिलना बहुत जरूरी है। हालांकि, नई बेंच खोलने का फैसला संसद, पेरेंट हाईकोर्ट और सभी संबंधित पक्षों को मिलकर लेना होता है। जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे।