बीजेपी ने मणिपुर में खेला वाई खेमचंद सिंह पर दांव, होंगे राज्य के 13वें सीएम
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में लंबे जातीय संघर्ष के बाद बीजेपी ने नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी का रास्ता साफ कर लिया है। 62 साल के युमनाथ खेमचंद सिंह राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। पूर्व सीएम एन बीरेन सिंह की मौजूदगी में उनके नाम का ऐलान किया गया है। वह राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के तौर पर बागड़ोर संभालेंगे।
इंफाल। मैतेई-कुकी के संघर्ष से झुलसे मणिपुर में बीजेपी ने फिर से सरकार गठन का रास्ता साफ कर लिया है। 62 साल के युमनाथ खेमचंद सिंह (वाई खेमचंद सिंह) राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। मणिपुर की राजधानी इंफाल में मंगलवार को बीजेपी विधायक दल के नेताओं की बैठक में वाई खेमचंद सिंह के नाम पर मुहर लगी। मणिपुर विधानसभा के पूर्व में अध्यक्ष रह चुके खेमचंद सिंह एक अनुभवी नेता हैं। वह पिछली सरकार में मंत्री के तौर अहम विभाग संभाल रहे थे, अब वह एन बीरेन सिंह की जगह लेंगे।
1. अनुभवी लीडर: मैतेई समुदाय से आने वाले वाई खेमचंद सिंह पांच साल विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं। इसके बाद वह मंत्री बने थे। वे एक अनुभवी नेता हैं। वाई खेमचंद सिंह मार्शला आर्ट में ब्लैक बेल्ट धारक हैं। वह एक दशक से अधिक वक्त से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने 2013 में राजनीति में कदम रखा था।
2. साफ-विश्वासनीय छवि: युमनाथ खेमचंद सिंह मणिपुर में साफ छवि वाले नेता माने जाते हैं। वह भले ही मैतेई समुदाय से आते हैं, लेकिन कुकी लोगों को उनमें भरोसा है। यह वाई खेमचंद सिंह ही थे, जिन्होंने दिसंबर महीने में कुकी रिलीफ कैंपों का दौरा किया था। तब वे सुर्खियों में आए थे। इतना ही नहीं उन्होंने खुले तौर पर राज्य में शांति बहाली की अपील की थी।
3. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव: युमनाथ खेमचंद सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह बीजेपी में आरएसएस के आदमी हैं। यह उनकी संघ से जुड़ाव और नजदीकी की वजह से है। राजनीतिक हलकों में भी उन्हें मणिपुर बीजेपी में एक भरोसेमंद RSS आदमी माना जाता है। वह कुकी-जो और नागा लोगों के लिए ज्यादा स्वीकार्य हैं। उन्हें एक लिबरल मैतेई के तौर पर देखते हैं। यही वजह है कि मणिपुर के पूर्व सीएम एन बीरेन सिंह के भरोसमंद आदमी से आलोचक बने युमनाथ खेमचंद सिंह परिस्थितियों में पहली पंसद बनकर उभरे।
खेमचंद ने पूर्व सीएम एन बीरेन सिंह से पुराने रिश्ते हैं। 2002 में बीरेन सिंह के साथ डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपल्स पार्टी के हिस्से के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था, जिसे भारत सरकार द्वारा नागा विद्रोही समूह के साथ 1997 के संघर्ष विराम को बढ़ाने के खिलाफ मेइतेई समूहों के आंदोलन के बाद शुरू किया गया था। बीरेन सिंह 2002 में इस पार्टी से विधायक चुने गए थे, जिसे उन्होंने बाद में विधानसभा में कांग्रेस में मिला दिया। ताइक्वांडो खिलाड़ी और शिक्षक वाई खेमचंद सिंह 2013 में बीजेपी में आए और फिर 2017 में सिंगजामेई सीट से जीते। इसके बाद वह विधानसभ स्पीकर बने, हालांकि उन्हें ऐसे वक्त पर राज्य की कमान मिली है जब उनके सामने अग्निपथ पर चलने जैसी चुनौती है। अगर वे इस पर खरे उतरते हैं तो खेमचंद्र सिंह बड़ी लकीर खीचेंगे।