बिहार को लेकर बोले सीईसी - 'मृत और स्थायी प्रवासियों को सूची में नहीं रख सकते
बिहार में सियासी घमासान चरम पर है। मतदाता पुनरीक्षण को लेकर बहस का स्तर बहुत ही निचले दर्जे तक आ चुका है। सभी दल के नेता एक-दूसरे को अपशब्द तक कहने लगे हैं। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में भी लगातार हंगामा हो रहा है। इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त का बयान सामने आया है। बयान में उन्होंने स्पष्ट किया है कि मृत वोटरों और स्थायी प्रवासी वोटरों का सूची में नाम रखना संभव नहीं है।
पटना। बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने गुरुवार (24 जुलाई, 2025) को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव निकाय प्रभावित होकर मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से प्रवास कर चुके लोगों, या कई जगहों पर पंजीकृत मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल रहने दे सकता है।
सीईसी ज्ञानेश कुमार की यह टिप्पणी विपक्षी दलों के बढ़ते हमलों के बीच आई है, जो बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चुनाव प्राधिकरण को लगातार निशाना बना रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि इस कदम से करोड़ों पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित हो जाएंगे।
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि क्या चुनाव आयोग द्वारा एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से तैयार की जा रही एक शुद्ध मतदाता सूची निष्पक्ष चुनावों और एक मजबूत लोकतंत्र की नींव नहीं है? उन्होंने जोर देकर कहा कि अयोग्य लोगों को पहले बिहार में और बाद में पूरे देश में वोट देने की अनुमति देना संविधान के खिलाफ है। सीईसी ने रेखांकित किया कि इन सवालों पर, कभी न कभी, हम सभी और भारत के सभी नागरिकों को राजनीतिक विचारधाराओं से परे जाकर गहराई से सोचना होगा।
बिहार में मतदाता सूची के चल रहे एसआईआर के तहत घर-घर जाकर किए गए सर्वेक्षण में, चुनाव अधिकारियों ने अब तक पाया है कि 52 लाख से अधिक मतदाता अपने पते पर मौजूद नहीं थे और 18 लाख अन्य मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है। ये आंकड़े आयोग के इस अभियान के औचित्य को मजबूत करते हैं।