सीजेआई ने पश्चिम बंगाल सरकार की बोलती की बंद, पूछा, जजों पर हमले के वक्त मुख्य सचिव का फोन क्यों नहीं लगा? डीएम - एसपी से भी जवाब-तलब
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हमले पर कड़ी नाराजगी जताई। सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि यह बेहद निराशाजनक है कि घटना के समय राज्य के मुख्य सचिव से संपर्क नहीं हो सका। कोर्ट ने मुख्य सचिव और डीजीपी से पूछा कि सूचना मिलने के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे? प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये पर कोर्ट ने जवाब तलब किया है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में लगे न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हुए हमले के मामले में राज्य प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बेहद निराशाजनक है कि जब न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया था और उन पर हमला किया जा रहा था, तब पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से संपर्क तक नहीं हो सका। कोर्ट ने पूछा कि जब प्रशासन को घेराव के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था तो सुरक्षा के प्रभावी उपाय क्यों नहीं किए गए?
पिछले हफ्ते की सुनवाई में भी कोर्ट ने राज्य प्रशासन के आचरण की आलोचना की थी। अब कोर्ट ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि सूचना मिलने के बावजूद उन्होंने स्थिति को संभालने में ढिलाई क्यों बरती।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस शिवगणनम द्वारा लिखे गए एक पत्र का भी जिक्र किया। इस पत्र में विशेष गहन संशोधन की प्रगति और अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा अपीलों के निपटान की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।