विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने कसी कमर, बघेल, डीके, सचिन, कन्हैया को अहम जिम्मेदारी

नई दिल्ली। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने कमर कस ली है। पार्टी ने असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए चुनाव प्रबंधन को मजबूत करते हुए सीनियर ऑब्ज़र्वर और ऑब्जर्वर की नियुक्ति कर दी है। कांग्रेस नेतृत्व ने राज्यों में संगठन को एक्टिव मोड में लाने और जमीनी स्तर पर रणनीति को धार देने के लिए यह अहम फैसला लिया है। असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष प्रियंका गांधी वाड्रा को बनाया है। वही छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को वरिष्ठ चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। 

Jan 7, 2026 - 20:48
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विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने कसी कमर, बघेल, डीके, सचिन, कन्हैया को अहम जिम्मेदारी


असम विधानसभा चुनाव

सीनियर ऑब्जर्वर: भूपेश बघेल
ऑब्जर्वर: डी.के. शिवकुमार

बंगाल विधानसभा चुनाव

पश्चिम बंगाल का चुनाव कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा चुनौती भरा होने वाला है। पार्टी यहां अपनी खोई जमीन तलाशने के लिए बड़े नेताओं की टीम बनाई है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बंगाल की 92 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसके एक भी प्रत्याशी नहीं जीत पाए। बंगाल में इस समय कांग्रस के पास एक भी सीट नहीं है। बंगाल में कांग्रेस ने सुदीप राय बर्मन, शकील अहमद खान, प्रकाश जोशी को पर्यवेक्षक पर बनाया है। राज्य में संगठन को दोबारा खड़ा करने और बूथ लेवल तक नेटवर्क मजबूत करने के लिए तीन वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

तमिलनाडु के लिए इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी

तमिलनाडु में सहयोगी दलों के साथ तालमेल और सीट शेयरिंग को लेकर वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और तेलंगाना के नेता उत्तम कुमार रेड्डी को अहम भूमिका दी गई है।

केरल विधानसभा चुनाव

केरल में युवा नेतृत्व और आक्रामक कैंपेन रणनीति के लिए पार्टी ने सचिन पायलट और कन्हैया कुमार जैसे चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं के.जे. जॉर्ज और इमरान प्रतापगढ़ी संगठनात्मक मजबूती पर फोकस करेंगे।

ऑब्जर्वर के नाम
सचिन पायलट
के.जे. जॉर्ज
इमरान प्रतापगढ़ी
कन्हैया कुमार

अहम है ये नियुक्तियां

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस बार केवल चुनाव नहीं, बल्कि संगठन की री-बिल्डिंग की रणनीति पर भी काम कर रही है। पर्यवेक्षकों को सीधे फीडबैक, टिकट वितरण की रिपोर्ट और गठबंधन समन्वय की जिम्मेदारी भी दी गई है। साफ है कि कांग्रेस इस बार चुनावी मैदान में फुल प्लानिंग मोड में उतरने की तैयारी कर चुकी है।