यमुना एक्सप्रेस-वे पर मौत का झपट्टाः मथुरा के सुरीर में कंटेनर ने बस से उतरकर खड़े छह यात्रियों की कुचल डाला, सभी का करुणांत, बस को भी टक्कर मारी
मथुरा। यमुना एक्सप्रेस-वे एक बार फिर खून से लाल हो गया। मथुरा जनपद की सीमा में सुरीर थाना क्षेत्र के माइल स्टोन 88 पर देर रात हुए भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। लघुशंका के लिए बस से उतरे यात्रियों को तेज रफ्तार कंटेनर ने रौंद दिया। छह लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे में बस भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
हादसा बीती रात ढाई बजे के बाद का बताया जा रहा है। दिल्ली के नांगलोई से कानपुर जा रही एक यात्री बस माइल स्टोन 88 के पास रुकी हुई थी। बस में सवार कुछ यात्रियों ने लघुशंका के लिए चालक से वाहन रोकने को कहा। नींद में डूबे यात्री जैसे ही बस से उतरकर सड़क किनारे खड़े हुए, तभी पीछे से आ रहा तेज रफ्तार कंटेनर अचानक अनियंत्रित हो गया।
कंटेनर ने पहले सड़क किनारे खड़े यात्रियों को बेरहमी से रौंदा और फिर बस से जा टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मौके पर ही छह लोगों ने दम तोड़ दिया, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर तड़पने लगा।
हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। कुछ ही क्षण पहले जो लोग अपनों के साथ सफर कर रहे थे, वे खून से लथपथ सड़क पर पड़े थे। अपनों को खो चुके लोग दहाड़े मारकर रो रहे थे। सड़क पर बिखरे शव, खून से सनी सड़क और क्षतिग्रस्त बस, दृश्य इतना भयावह था कि देखने वालों की रूह कांप गई। सब कुछ पलक झपकते हुआ और मौत ने झपट्टा मार लिया।
मृतकों में औरैया के एरवा कटरा निवासी सोनू उर्फ पुष्पांक (32), बस्ती के भेलवल गांव निवासी देवेश (32), कन्नौज के गड़े का पुरवा निवासी असलम (27) और दिल्ली के प्रेम नगर निवासी संतोष (46), औरैया के कंचौसी गांव निवासी अनुराग (27) तथा फिरोजाबाद के बड़गांव निवासी प्रमोद (35) शामिल हैं। हादसे में औरैया के बेला निवासी अमर दुबे घायल हुए हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सूचना मिलते ही पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां छह लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस शेष दो शवों की पहचान के प्रयास कर रही है। पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी कराई जा रही हैं।
इस दर्दनाक हादसे ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर यमुना एक्सप्रेस-वे जैसे नियंत्रित मार्ग पर बस को बीच रास्ते क्यों रोका गया, जबकि वहां यात्रियों के लिए निर्धारित विश्राम स्थल मौजूद हैं। लापरवाही, तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी ने एक बार फिर निर्दोष लोगों की जान ले ली।