हिंदू पहचान का छल और धर्मांतरण का जाल: ‘प्रिंस’ बनकर 300 लड़कियों का शोषण करने वाला बस्ती का हिस्ट्रीशीटर अजफरुक हक गिरफ्तार, नेपाल से मुंबई तक फैला रखा था नेटवर्क
बस्ती। जिले में कोतवाली पुलिस ने एक ऐसे शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसने धर्म, पहचान और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सैकड़ों लड़कियों को फंसाया। अजफरुक हक उर्फ प्रिंस पर आरोप है कि वह हिंदू नाम और पहचान अपनाकर युवतियों से दोस्ती करता, आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करता और कई को देह व्यापार व धर्मांतरण के जाल में धकेल देता था। गिरफ्तारी के बाद एक-एक कर पीड़िताएं सामने आ रही हैं।
बस्ती। बस्ती जिले की कोतवाली पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर अजफरुक हक उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी पर पहले से 21 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह सोशल मीडिया के जरिए युवतियों से संपर्क करता था, खुद का प्रिंस नाम बताकर हिंदू पहचान बनाता, हाथ में कलावा बांधता और विश्वास जीतने के बाद उनका शोषण करता था।
पुलिस का कहना है कि आरोपी ने एक युवती को प्रेमजाल में फंसाकर लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। इस युवती के पुलिस में शिकायत करने के बाद इस शातिर का घिनौना सच सामने आया। पुलिस की जांच में सामने आया है कि वह अब तक करीब 300 लड़कियों के आपत्तिजनक वीडियो बना चुका है, जिनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया गया। कई पीड़िताओं को डराकर देह व्यापार के धंधे में धकेले जाने के भी आरोप हैं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार अजफरुक हक का नेटवर्क बस्ती से लेकर नेपाल और मुंबई तक फैला हुआ था। पुलिस को आशंका है कि यह एक संगठित रैकेट था, जिसमें धर्मांतरण का एंगल भी शामिल है। आरोपी कथित तौर पर लड़कियों को भावनात्मक रूप से तोड़कर पहचान बदलने और नए जीवन का झांसा देता था।
गिरफ्तारी के बाद अब पीड़ित लड़कियां सामने आ रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अन्य जिलों में भी इससे प्रभावित युवतियां हो सकती हैं, जिनकी पहचान और बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल, महिला प्रकोष्ठ और अन्य एजेंसियों को भी जांच में जोड़ा गया है।
इस मामले में पुलिस अब तक मुख्य आरोपी सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित और संगठित रैकेट था, जिसमें आरोपी के परिजन भी शामिल पाए गए हैं। पुलिस को आशंका है कि पीड़िताओं की संख्या और अधिक हो सकती है, लेकिन भय और सामाजिक दबाव के चलते कई युवतियां अभी तक सामने नहीं आ सकी हैं। जांच लगातार जारी है और नेटवर्क की अन्य कड़ियों को खंगाला जा रहा है।