आर्मी, नेवी, एयरफोर्स से बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह- हमें तैयार रहना होगा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों से पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़कर अपरंपरागत खतरों से निपटने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है। उन्होंने संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन 2025 में वैश्विक परिवर्तनों और सुरक्षा व्यवस्था पर उनके प्रभाव के आकलन पर जोर दिया। सम्मेलन में सेना के आधुनिकीकरण, संयुक्तता और परिचालन तत्परता को बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया।

Sep 16, 2025 - 20:10
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आर्मी, नेवी, एयरफोर्स से बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह- हमें तैयार रहना होगा

 

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों से युद्ध की पुरानी रणनीति से आगे बढ़कर सूचना, वैचारिक, पारिस्थितिक और जैविक युद्ध जैसे अपरंपरागत खतरों से उत्पन्न अदृश्य चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क और तैयार रहने का आह्वान किया है। आज कोलकाता में संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन 2025 को संबोधित करते हुए, रक्षा मंत्री ने अशांत वैश्विक व्यवस्था, क्षेत्रीय अस्थिरता और उभरते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए, दुनिया भर में हो रहे परिवर्तनों और देश की सुरक्षा व्यवस्था पर उनके प्रभाव के निरंतर आकलन की आवश्यकता पर बल दिया।

इस बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) श्री संजीव कुमार, सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) डॉ नितेन चंद्रा, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ समीर वी कामत, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) डॉ मयंक शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया है, ‘‘रणनीतिक मुद्दों की एक विस्तृत शृंखला पर विचार-विमर्श किया जा रहा है, जिसमें सेना का आधुनिकीकरण, संयुक्तता, एकीकरण और बहु-क्षेत्रीय युद्ध के लिए परिचालन तत्परता को बढ़ाना शामिल है।’’ यह द्विवार्षिक सम्मेलन सशस्त्र बलों का शीर्ष विचार-मंथन मंच है, जो देश के शीर्ष नागरिक और सैन्य नेतृत्व को वैचारिक और रणनीतिक स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए एक साथ लाता है। साथ ही इसमें विभिन्न रैंक के अधिकारियों के साथ संवाद सत्र भी होते हैं।

इस वर्ष 16वां सम्मेलन आयोजित किया जा रहाहै जिसमें सुधारों, परिवर्तन, बदलाव और अभियानगत तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसका विषय है ‘सुधारों का वर्ष - भविष्य के लिए परिवर्तन’। रक्षा अधिकारी ने कहा, ‘‘सम्मेलन का ध्यान संस्थागत सुधारों, गहन एकीकरण और तकनीकी आधुनिकीकरण के प्रति सशस्त्र बलों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही बहु-क्षेत्रीय अभियानगत तैयारियों के उच्च स्तर को बनाए रखना भी इसमें शामिल है।’’

शीर्ष कमांडरों द्वारा पीएम को आपरेशन सिंदूर के बाद निर्मित नई सामान्य स्थिति सहित नई उभरती तकनीक और रणनीति एवं भविष्य के युद्ध व सेनाओं की परिचालन तत्परता के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। पीएम ने आपरेशनल तत्परता को बढ़ाने के लिए सैन्यबलों में एकीकरण, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर दिया।

इससे पहले सोमवार को पीएम मोदी ने शीर्ष सैन्य कमांडरों के साथ तीन घंटे से अधिक समय पूर्वी कमान मुख्यालय में बिताया था। रक्षा मंत्रालय की ओर से एक बयान में बताया गया कि पीएम मोदी ने इस दौरान शीर्ष सैन्य कमांडरों के साथ सुरक्षा स्थिति, रक्षा तैयारियों और पिछले वर्षों में लागू किए गए सुधारों एवं अगले दो वर्षों की योजना की भी समीक्षा की। शीर्ष कमांडरों द्वारा पीएम को आपरेशन सिंदूर के बाद निर्मित नई सामान्य स्थिति सहित नई उभरती तकनीक और रणनीति एवं भविष्य के युद्ध व सेनाओं की परिचालन तत्परता के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।