विश्व कप में आज 'करो या मरो' की जंग: तीन महामुकाबलों में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर, उलटफेर की पूरी संभावना, इंग्लैंड की डीआर कांगो से, बेल्जियम की सेनेगल से और मेजबान अमेरिका की बोस्निया-हर्जेगोविना से होगी भिड़ंत, जीतने वाली टीमें बढ़ेंगी अंतिम-16 की ओर
न्यूयॉर्क। फीफा विश्व कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। राउंड ऑफ-32 के मुकाबलों में बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात फुटबॉल प्रेमियों को तीन हाई-वोल्टेज मैच देखने को मिलेंगे। इंग्लैंड, बेल्जियम और मेजबान अमेरिका जैसी मजबूत टीमों के सामने क्रमशः डीआर कांगो, सेनेगल और बोस्निया-हर्जेगोविना की चुनौती होगी। नॉकआउट चरण होने के कारण हर मुकाबला 'करो या मरो' का है, जहां हारने वाली टीम का विश्व कप अभियान तुरंत समाप्त हो जाएगा।
विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में अब किसी भी टीम के पास गलती की गुंजाइश नहीं बची है। ग्रुप चरण में शानदार प्रदर्शन कर आगे बढ़ी टीमें अब अंतिम-16 में जगह बनाने के लिए पूरा दमखम लगाएंगी। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि इस चरण में छोटे अंतर वाली टीमें भी बड़े उलटफेर करने की क्षमता रखती हैं।
इंग्लैंड के सामने डीआर कांगो की चुनौती
इंग्लैंड ने ग्रुप चरण में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया और खिताब के प्रमुख दावेदारों में अपनी जगह मजबूत की। टीम के पास संतुलित आक्रमण और मजबूत रक्षा पंक्ति है। हालांकि उसके सामने डीआर कांगो की चुनौती को हल्के में नहीं लिया जा सकता। डीआर कांगो ने 1974 के बाद पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में जगह बनाई है और पूरे टूर्नामेंट में अनुशासित रक्षात्मक खेल तथा तेज पलटवार के दम पर सभी को प्रभावित किया है। ऐसे में इंग्लैंड को जीत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।
बेल्जियम-सेनेगल मुकाबले पर भी रहेंगी निगाहें
दूसरे मुकाबले में बेल्जियम और सेनेगल आमने-सामने होंगे। बेल्जियम अनुभवी खिलाड़ियों के दम पर जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही है, लेकिन अफ्रीकी टीम सेनेगल किसी भी बड़े प्रतिद्वंद्वी को चौंकाने की क्षमता रखती है। कठिन ग्रुप चरण पार कर नॉकआउट में पहुंची सेनेगल की टीम आत्मविश्वास से भरी हुई है। हालांकि टीम को अपने प्रमुख गोलकीपर एडुआर्ड मेंडी की गैरमौजूदगी का सामना करना पड़ सकता है, फिर भी उसकी तेज गति और आक्रामक खेल बेल्जियम के लिए चुनौती बन सकता है।
मेजबान अमेरिका पर रहेगा दबाव
तीसरे मुकाबले में मेजबान अमेरिका का सामना बोस्निया-हर्जेगोविना से होगा। घरेलू मैदान और दर्शकों के समर्थन के कारण अमेरिका का मनोबल ऊंचा है। ग्रुप चरण में टीम ने संतुलित प्रदर्शन करते हुए नॉकआउट में प्रवेश किया। दूसरी ओर बोस्निया-हर्जेगोविना इस विश्व कप की उभरती हुई टीमों में शामिल है। मजबूत रक्षापंक्ति और सामूहिक खेल के दम पर उसने यहां तक का सफर तय किया है और अब मेजबान टीम को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है।
हर मैच से बदलेगा टूर्नामेंट का समीकरण
इन तीनों मुकाबलों के विजेता अंतिम-16 में प्रवेश करेंगे और विश्व कप खिताब की दौड़ में अपनी दावेदारी मजबूत करेंगे। वहीं हारने वाली टीमों का अभियान यहीं समाप्त हो जाएगा। यही वजह है कि फुटबॉल जगत की निगाहें इन मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां अनुभव और युवा जोश के बीच रोमांचक संघर्ष देखने को मिल सकता है।