ड्यूटी का दबाव बना जानलेवा: बरेली में बीएलओ की अचानक मौत, स्कूल में शिक्षक थे, काम करते समय अचानक गिर पड़े और प्राण पखेरू उड़ गये

बरेली जिले में ड्यूटी के दौरान बीएलओ के रूप में तैनात एक शिक्षक की अचानक मौत ने प्रशासनिक सिस्टम में बढ़ते दबाव और कामकाज की अमानवीय परिस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Nov 27, 2025 - 13:05
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ड्यूटी का दबाव बना जानलेवा: बरेली में बीएलओ की अचानक मौत, स्कूल में शिक्षक थे, काम करते समय अचानक गिर पड़े और प्राण पखेरू उड़ गये
शिक्षक सर्वेश कुमार, जिनकी अचानक मौत की वजह बीएलओ ड्यूटी से जनित तनाव बताया जा रहा है।

-आरके सिंह-

बरेली। जिले के ग्रामीण क्षेत्र में तैनात प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक और बीएलओ सर्वेश कुमार (47) की बुधवार सुबह ड्यूटी के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 10:30 बजे स्कूल में कार्य करते समय वह अचानक गिर पड़े। स्थानीय लोगों और स्टाफ ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर डीएम अविनाश सिंह, एडीएम सदर प्रमोद कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और स्थिति का जायज़ा लिया। एडीएम सदर प्रमोद कुमार ने पुष्टि की कि बीएलओ ड्यूटी के दौरान शिक्षक सर्वेश कुमार की मौत हुई है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

सर्वेश कुमार बरेली के भोजीपुरा ब्लॉक के परधौली गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात थे। परिवार का आरोप है कि इस बार एसआईआर  कार्य को लेकर अधिकारियों का अत्यधिक दबाव था। उनके बड़े भाई योगेश गंगवार, जो स्वयं भी शिक्षक और सुपरवाइजर हैं, ने बताया कि सर्वेश से लगातार देर रात तक काम कराया जा रहा था। कभी 11 बजे, कभी 12 बजे तक। आरोप है कि अत्यधिक दबाव और अधिकारियों की फटकार के चलते उनके भाई मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद तनाव में थे, जिसका परिणाम यह दुखद घटना बनी।

दुर्भाग्य यह है कि सर्वेश कुमार की मौत ने उनके परिवार को दोहरी त्रासदी में धकेल दिया है। दो महीने पहले ही उनकी पत्नी प्रभा की कैंसर से मौत हो गई थी। अब सर्वेश के दो जुड़वां बच्चे अहाना और अयांश (उम्र 5 वर्ष) अनाथ हो गए हैं।

2015 में शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए सर्वेश अपने परिवार की उम्मीदों का सहारा थे। उनके भाई ने कहा कि कभी भी कार्यभार इतना अत्यधिक नहीं हुआ जितना इस बार एसआईआर और बीएलओ ड्यूटी के दौरान था।

यह घटना अधिकारियों की जवाबदेही, कार्य के मानवीय वातावरण और सरकारी कर्मचारियों पर पड़ते बढ़ते बोझ पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

SP_Singh AURGURU Editor