यूपी में गुल हो सकती है बिजली, 10 दिसंबर को आगरा में जन पंचायत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के कर्मचारियों की ओर से बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। यूपी पावर कारपोरेशन प्रबंधन की ओर से घाटा दिखाते हुए प्रदेश की बिजली कंपनियों को पीपीपी मोड पर चलाने का फैसला लिया गया है। अब बिजली विभाग निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी के फैसले का चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने एक बड़ी बैठक की। इसके बाद आंदोलन का ऐलान किया गया। निजीकरण के फैसले के खिलाफ बड़े जनसंपर्क अभियान और जन पंचायतों के आयोजन की तैयारी की गई है। पहली जन पंचायत चार दिसंबर को पीएम नरेंद्र मोदी के चुनावी क्षेत्र वाराणसी में होगी।

Nov 27, 2024 - 15:40
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यूपी में गुल हो सकती है बिजली, 10 दिसंबर को आगरा में जन पंचायत

यूपी विद्युत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा की बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ से अपील की गई है कि व्यापक जनहित में वाराणसी और आगरा विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय को रद्द किया जाए। समिति ने यह भी निर्णय लिया कि निजीकरण के बाद होने वाली कठिनाइयों से लोगों को अवगत कराने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। जन जागरण अभियान के पहले चरण में आगामी 4 दिसंबर को वाराणसी में और 10 दिसंबर को आगरा में जन पंचायत आयोजित होगी। जन पंचायत में बिजली कर्मियों के साथ ही आम उपभोक्ता शामिल होंगे।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति प्रमुख पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान में कहा कि पॉवर कारपोरेशन का फैसला कर्मचारियों और आम जनता के हित में नहीं है। 25 जनवरी 2000 को मुख्यमंत्री के साथ हुए लिखित समझौते में यह साफ है कि बिजली सुधार अंतरण स्कीम के लागू होने से हुए उपलब्धियों का मूल्यांकन कर यदि आवश्यक हुआ तो पूर्व की स्थिति बहाल करने पर एक वर्ष बाद विचार किया जाएगा। 2000 में राज्य विद्युत परिषद के विघटन के बाद 77 करोड़ रुपये का घाटा अब 25 वर्ष के बाद 1.10 लाख करोड़ का हो गया है।

संयुक्त समिति ने कहा कि विघटन का प्रयोग पूरी तरह असफल रहा। 25 जनवरी 2000 के समझौते के अनुसार पूर्व की स्थिति बहाल की जानी चाहिए। वहीं, मैनेजमेंट निजीकरण पर उतारू है। अप्रैल 2018 और अक्तूबर 2020 में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा एवं मंत्रीमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के साथ हुए समझौते में यह साफ है कि प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार के लिए कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्रवाई होगी। कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना राज्य में कोई निजीकरण नहीं होगा।